समर्थक

गुरुवार, 7 अक्तूबर 2010

poem-asambhav kee talash

ichcha करो
उस चीज की
जो मिलनी
असंभव हो;
असंभव की तलाश में
'संभव' तो मिलेगा.
जो आदमी
पाकर धरती
को संतुष्ट
हो जाता तो
सूर्ये;चंद्रमा'
मंगल;इनके
विषय में कैसे
जान पता;
यही रास्ता है
हमारी तरक्की का;
इसे ही अपनाओं
इसी पर प्रतिपल
आगे बढते जाओ.

कोई टिप्पणी नहीं: