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शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

नूतन वर्ष 2012 की हार्दिक शुभकामनाएं स्वीकार करें







छम  छम  छमकता आया  नया  साल  
खन खन  खनकता  आया  नया  साल  
नए   साल  में   हिंदुस्तान   में  
चेहरों  पर  खिल   जाये   मुस्कान  

जो   हैं  सपने  तेरे  अधूरे  
हो   जाए  नए साल में पूरे  
जुड़  जाये आशा  के  धागे 
सारी  मायूसी अब भागे  
चम् चम् चमकता आया नया साल
दम दम दमकता आया नया साल 
नए साल में ........


मिट जाएँ गम के अँधेरे
नित दिन  खुशियों के हो सवेरे 
पथ से हट जाये सब कांटे 
मंगलमय हो दिन और रातें 
खुशबू लुटाता आया नया साल 
मन हर्षाता आया नया साल 

                         नूतन  वर्ष  2012 की  हार्दिक  शुभकामनाएं  स्वीकार करें .
                                                                                                             शिखा कौशिक
                                                                                     [vikhyat ]

मंगलवार, 27 दिसंबर 2011

ये औरत ही है !


ये औरत ही है !



पाल कर कोख में जो जन्म देकर बनती  है जननी 
औलाद की खातिर मौत से भी खेल जाती है .


बना न ले कहीं अपना वजूद औरत 
कायदों की कस दी  नकेल जाती है .


मजबूत दरख्त बनने नहीं देते  
इसीलिए कोमल सी एक बेल बन रह जाती है .


हक़ की  आवाज जब भी  बुलंद करती है 
नरक की आग में धकेल दी जाती है 





फिर भी सितम  सहकर  वो   मुस्कुराती  है 
ये औरत ही है जो हर  ज़लालत  झेल  जाती  है .


                                          शिखा कौशिक 
                           [vikhyaat  ]













बुधवार, 21 दिसंबर 2011

भारत तो धरती को रब की सौगात है !






सिन्दूरी सुबह है ...उजली हर रात है 
अपने वतन की तो जुदा हर एक बात है 
जितने नज़ारे हैं जन्नत से  प्यारे है 
भारत तो धरती को रब की सौगात है .


बासन्ती मादकता मन को लुभाती है 
रंगीले फागुन में सृष्टि रंग जाती है 
गर्मी  मिटाने  आती  सावन  फुहारे  है 
सब  ऋतुओं  में आ  जाती उत्सव  बहारे  हैं 
गहरे निशा के तम में उज्जवल  प्रभात है 
भारत इस धरती .............................


पर्वत  हिमालय जैसा  सिर  पर  एक ताज  है 
पावन गंगा हर लेती हम  सबके  पाप  है 
बागों  में कोयल  गाती  कितना  सुरीला  है 
अपने वतन में सब  कुछ  कितना  रंगीला  है 
सूखी -प्यासी  धरती पर  ठंडी  बरसात  है 
भारत इस धरती को .....
                                                  शिखा  कौशिक  
                                       [विख्यात  ]

शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011

आज करता है हिंदुस्तान सलाम !

आज करता है हिंदुस्तान  सलाम !


[१६ नवम्बर  पर विशेष ] 







जो लुटा देते जान अपनी वतन के लिए 
जो बहा देते खून अपना  वतन के लिए 
उन शहीदों को ....खुशनसीबों को 
आज करता है हिंदुस्तान 
सलाम-सलाम-सलाम !


इस धरती के लाल हैं वे 
'भारत माँ के दुलारे '
कौन भुला सकता है उनको 
जगमगाते सितारे 
उन जवानों को 
उन दीवानों को 
आज करता है हिंदुस्तान 
सलाम-सलाम-सलाम .


शत्रु के आगे न झुकते 
बढ़ते कदम नहीं रुकते 
वे रण में पीछे न हटते 
माँ की आन पे मिटते 
उन सपूतों को 
देवदूतों को 
आज करता है हिंदुस्तान  
सलाम- सलाम -सलाम 
                                    शिखा कौशिक 
                               [विख्यात ] 







बुधवार, 14 दिसंबर 2011

मेरे भोले की बम-बम !

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मेरे मन बनकर तू डमरू 
करता जा डम-डम-डम 
तेरी डम -डम में गूंजेंगी 
मेरे भोले की बम-बम 
मेरे मन बनकर तू ......


मेरा भोला सब भक्तों  के 
है सारे  कष्ट  मिटाता  
वो भक्तों की रक्षा  हित  
है कालकूट  पी  जाता 
मेरी  जिह्वा  करती चल  तू 
शिव महिमा   का ही वर्णन  
मेरे मन ..........................


मेरा भोला कितना  भोला 
नागों  का हार  पहनता   
वो  जटाजूट  में अपने 
गंगा  को  धारण  करता
मैं कण -कण  में करती हूँ 
शिव-शंकर का ही दर्शन .
मेरे बन ................


सावन में कांवड़ लेकर  जो    
गंगाजल लेने जाते 
लाकर शिवलिंग  पर उसको      
श्रृद्धा  सहित चढाते 
हर इच्छा पूरी होती 
पावन हो जाता जीवन .
मेरे मन बनकर.....


द्वादश ज्योतिर्लिंगों  में शिव
-शक्ति ज्योत समाई ;
इनके दर्शन से भक्तों ने 
भय से मुक्ति पाई ;
गौरी-शंकर के चरणों में 
तन -मन-धन सब अर्पण 
मेरे मन बनकर .....


                                  शिखा कौशिक 
                        [विख्यात ]












शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

बन गयी दवाओं की गुलाम जिन्दगी






टैबलेट  के हुक्म पर चलती है जिन्दगी 
बन गयी दवाओं की गुलाम जिन्दगी .


सिर में दर्द है तो बाम लगा लो 
नयनों में हो पीड़ा  ये ड्रॉप टपका लो 
गोली के इशारो पर अब नाचे जिन्दगी 
बन गयी ............


पानी  -दूध-फल ताकत  नहीं लाते 
कैप्सूल -सीरप शक्ति हैं बढ़ाते 
कडवी दवाओं ने कर दी कडवी जिन्दगी 
बन गयी दवाओं .........


हर घर में आती है अब रोज़ दवाई 
पानी जैसी बहती मेहनत की कमाई 
लगती अस्पताल सी अब सबकी जिन्दगी 
बन गयी दवाओं ........


जिसने  कारोबार   दवाओं का  कर लिया 
नोटों  से अपना   घर है भर लिया     
कर डाली  दवाओं ने नीलाम  जिन्दगी 
बन गयी ........................
                                       शिखा  कौशिक  
                            [विख्यात ]
                              





बुधवार, 7 दिसंबर 2011

मोबाईल मियां क़ा जलवा.


मोबाईल मियां क़ा जलवा






           

ये काम न करना था पर मैंने कर लिया 
यारों ने जिद किया था मोबाइल ले लिया .

वे बोले तू कंजूस है ;टच में नहीं रहता 
यारों के ऐसे ताने कैसे मैं सह लेता ?
ले  आया एक सैट  उसमे सिम भी डलवाया 

खुश होकर दोस्तों को नंबर भी बतलाया 
फिर घंटी दे देकर मुझको परेशान कर दिया .
यारों  ने जिद करी ....

रिंगटोन पर हुआ था घर में बड़ा झगडा 
बच्चों की पसंद थी इसमें पॉप और भंगड़ा ;
मैं बोला इसमें मन्त्र या चौपाई बजेगी 
पर लग गया था मुझको झटका बड़ा तगड़ा 
वाइफ ने उनके पक्ष में मतदान कर दिया 
यारों ने जिद करी थी .....
बेटा मैसेज करता रहता ; बेटी करती है चैट 
वाइफ के बात करने का टाइम है इस पर सैट 
ये बन गया है मेरा अब  दुश्मन नंबर -१
ये बजता  है तो लगता जैसे हो फटा बम 
मेहनत की कमाई को मिनटों  में पी गया 
यारों ने जिद ............
                                              शिखा  कौशिक  
                                 [विचारों का चबूतरा ]
[sabhi photo ''fotosearch.com'' se sabhar ]

रविवार, 4 दिसंबर 2011

भारत माँ को नमन


भारत माँ को नमन 



अपनी जमीन सबसे प्यारी है ;
अपना गगन सबसे प्यारा है ;
बहती सुगन्धित मोहक पवन ;
इसके नज़ारे चुराते हैं मन ;
सबसे है प्यारा  अपना वतन ;
करते हैं भारत माँ को नमन 
वन्देमातरम !वन्देमातरम !
करते हैं भारत माँ ! को नमन .
उत्तर में इसके हिमालय खड़ा ;
दक्षिण में सागर सा पहरी अड़ा ;
पूरब में इसके खाड़ी बड़ी ;
पश्चिम का अर्णव करे चौकसी ;
कैसे सफल हो कोई दुश्मन ! 
करते हैं भारत माँ को नमन !
वन्देमातरम !वन्देमातरम !
करते हैं भारत माँ! को नमन .

हम तो सभी से बस इतना कहें ;
हिन्दू मुसलमान मिलकर रहें ;
नफरत की आंधी अब न चले;
प्रेम का दरिया दिलों में बहे ;
चारों दिशाओं में हो अमन ;
करते हैं भारत माँ! को नमन !
वन्देमातरम!वन्देमातरम!
करते हैं भारत माँ !को नमन .
                          जय हिंद !

शुक्रवार, 2 दिसंबर 2011

रफ़्तार से चलेंगें -चाहें मारेंगें [speed thrills but kills ]


[bikewalls .com  से साभार ]


ये गीत है उन सभी के लिए जो अपने वाहन को  इतना तेज दौड़ते हैं कि न तो उन्हें अपनी जान की चिंता है और न ही किसी अन्य की .स्पोर्ट्स बाइक रखने वाले किशोर व् युवा तो मानो आसमान में उड़ जाना चाहते हैं -ये अलग बात है कि कभी वे खुद दुर्घटना का शिकार होते हैं तो कभी किसी अन्य की जान ले लेते हैं .किसी भी अन्य कारण की तुलना में  आज सबसे ज्यादा जानें सड़क दुर्घटनाओं में जा रही हैं .इसलिए अपने को नियंत्रित  कीजिये  क्योंकि  घर पर आपका कोई इंतजार करता होता है .हीरो बनने के चक्कर में न तो अपनी जान जोखिम में डालिए और न ही किसी और की जान लीजिये  .गीत में हीरों बनने वाले व्यक्ति की भावनाओं को ही प्रकट करने का प्रयास किया है -कहीं आप भी तो ऐसा नहीं सोचते -


रफ़्तार  से  चलेंगें -चाहें मारेंगें [speed thrills but kills ]




रोके से न रुकेंगें 
जो चाहेंगें करेंगें ;
अपनी स्पोर्ट्स बाइक 
लगती है वैरी नाईस;
इसपे चलेंगें रफ़्तार से 
सारी  दुनिया  जाये  भाड़  में .


अपनी रगों में नया खून है 
तेजी का हमपर जूनून है ;
धीरे चलना है मुश्किल 
चलते हैं ऐसे तो बुझदिल ;
हम तो उड़ेंगे बड़ी शान से 
दौड़ेंगें बन तूफ़ान से 
अपनी स्पोर्ट्स बाइक .........
सारी दुनिया .......


हीरो के जैसा स्टाइल है 
होठों पे रहती स्माइल है ;
हमको फ़िक्र न किसी बात की 
ना खबर दिन रात की ;
अपनी स्पोर्ट्स ......
कुछ तो करके रहेंगें 
मारेंगे या मरेंगें 
सारी दुनिया जाये भाड़ में .
                                 शिखा कौशिक 
                             [विख्यात ]

गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

शिव महापुराण -८


शिव महापुराण -८ 

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ऐसी साधना ह्रदय में करती सदा आलोक है ;
साधक को प्राप्त होता दिव्य शिव का लोक है ;
श्रवण-मनन का पुन: विस्तार से वर्णन किया ;
सूत जी ने ऋषि -कर्णों में था अमृत भर दिया  .

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प्रभु के दिव्य-गुणों को एकाग्रचित्त हो सुनना ;
दृढ -मति से सुन चित्त में सदा ही धरना ;
ये ''श्रवण'' है इसका तुम ध्यान सदा रखना ;
शिव के भक्त बनकर उद्धार अपना करना .


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श्रद्धा और भक्ति से शिव नाम जाप करना ;
''कीर्तन'' कहते इसे ;तुम स्मरण में रखना ;
रूप;गुण व् नाम का मन से जब चिंतन करो 
''मनन''कहते हैं इसे ;शिव स्वरुप उर में धरो .


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इन तीन विधियों से सदा जो शिव -आराधन में लगे ;
उसकी जीवन-नैय्या तो पार भव-सागर लगे ;
मैं सुनाता हूँ तुम्हे प्राचीन एक आख्यान ;
सूत जी बोले सुने होकर के सावधान .

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सरस्वती सरिता-तट पर तप कर रहे महान ;
ऐसे वेदव्यास जी से पूछते सनत्कुमार 
आप किस लक्ष्य  से कर रहे हैं तप यहाँ ?
वेदव्यास बोले बस मुक्ति है लक्ष्य मेरा .

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तब सनत्कुमार ने विनम्र हो बोले वचन 
पूर्व में मैंने भी तप को  माना था मुक्ति-सदन ;
मंदराचल पर मैं भी था तप बड़ा करने लगा 
तब नंदिकेश्वर ने ज्ञान मुझको ये दिया 

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तप को मुक्ति मार्ग कहना एक बड़ा अज्ञान है;
मुक्ति मन्त्र तो शिव-महिमा का श्रवण-गान है ;
इस  ज्ञान ने मिटा दी भ्रम की काली छाया ;
छोड़ मिथ्या-मार्ग को सत्य -पथ अपनाया .

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हे मुनियों  !व्यास  जी को जब  मिला ये ज्ञान ;
हो गया हर प्रश्न का उत्तम ही समाधान ;
दिव्य ज्ञान ने उनका मार्ग था प्रशस्त किया ;
सत्य-पथ पर चल सिद्धि रुपी फल उनको मिला .


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इस कथा को जब सुना मुनियों ने फिर से कहा 
सूत जी पुन: कहिये प्राणी का मुक्ति-मार्ग क्या ?
सूत जी उवाच -तीनो उपाय से शिव भक्ति करो 
और संग पवित्र लिंगेश्वर-स्थापना करो .

                                           [जारी ....]
                शिखा कौशिक 


मंगलवार, 29 नवंबर 2011

शान से ये तिरंगा लहरता रहे !




मेरा दिल ये  कहे  ; हम रहें  न  रहें  
शान  से  ये  तिरंगा  लहरता  रहे ,
साँस  चलती   रहे ; साँस  थमती  रहें   
ये  वतन का गुलिस्ता महकता रहे .
मेरा दिल ये कहे ..............

अब वतन में चले बस अमन की हवा 
एक होकर रहें बस यही है दुआ ,
जग के अम्बर पर बन के सितारा वतन 
हर बुलंदी पे हर दम चमकता रहे .
मेरा दिल ये कहे ..................
याद अपने शहीदों की जिन्दा रहे 
हर कदम देश-भक्ति के पथ पर बढे ;
जान देने को अपने वतन के लिए 
हर घडी अपना दिल भी मचलता रहे .
मेरा दिल ये कहे ............
इन लबों पर रहे 'भारत माता ' की जय 
और लक्ष्य हमारा हो शत्रु-विजय ,
सुन के ललकार भारत के वीरों की ये 
 शत्रु दल का ह्रदय भी दहलता रहे .
मेरा दिल ये कहे ......
[सभी फोटोस इन.कॉम से साभार ]
                          शिखा कौशिक    
                 [विख्यात  ]


शनिवार, 26 नवंबर 2011

सारा दिन घर में आराम से रहती हो !


सारा दिन घर में आराम से रहती हो !

[google se sabhar ]
सारा दिन घर में रहती हो 
तुम क्या जानो दुनिया के धंधे ?
मैं बाहर जाता हूँ 
कितना थक जाता हूँ !
तुम तो आराम से रहती   हो ;
एक बात पूछूं 
तुम सारे दिन घर में करती क्या हो ?

सबसे पहले  जागकर 
घर की कर लेती हो झाड़ू-बुहारी ;
नहा-धोकर पूजा करती हो 
फिर नाश्ते की तैयारी ;
झूठे बर्तन मांज देती हो ;
हमारा टिफिन लगा देती हो ;
फिर.......फिर ...जब मैं ऑफिस 
और बच्चे चले जाते हैं स्कूल 
तब ...तुम ..क्या करती हो ?
सारा दिन घर में आराम
 से ही तो रहती हो .

दोपहर में मैले कपडे धोकर 
सुखा देती हो ;
बच्चे स्कूल से लौट आते  हैं 
खाना बनाकर खिला देती हो ,
होमवर्क में उनकी मदद कर देती हो ,
इसके बाद ........इसके बाद ..
क्या करती हो ?
दिन भर घर में आराम से ही तो 
रहती हो !

घर में  आराम से रहने के  बावजूद 
जब मैं थका-हरा शाम को 
घर लौटता हूँ तुम कुछ 
थकी-थकी सी लगती हो ;
मैं फ्रेश होकर आता हूँ 
तुम भोजन लगा देती हो ,
सूखे कपडे समेट लाती हो ;
उनपर स्त्री कर देती हो ,
शाम की चाय बनाकर 
रात के भोजन की तैयारी में लग जाती हो ,
परोसती हो ,खिलाती हो 
रसोई घर   का सारा काम निबटाती  हो 
फिर...फिर....फिर ...
लेटते ही सो जाती हो 
समझ में नहीं आता इतना ज्यादा 
कैसे थक जाती ही ?
जबकि दिनभर घर में आराम से रहती हो !
                                                             शिखा कौशिक 
                                                      [विख्यात ]



गुरुवार, 24 नवंबर 2011

सरहद पर हमें जाना है !


सरहद पर हमें जाना है !



सरहद पर हमें जाना है 
दुश्मन   ने   ललकारा    है 
मत  रोक हमें अब माता  .....मत  रोक  
मुश्किल अब   रुक पाना   है .





आग  लगी है प्राणों में 
फड़क रही हैं  भुजाएं 
भारत माँ ! के जयकारे से 
गूंजेंगी चारो दिशाएं 


दुश्मन को धूल चाटना है 
अपना वचन निभाना है 
मत  रोक हमें अब बहना....मत रोक 
मुश्किल अब रुक पाना है . 

शातिर है दुश्मन हमारा 
चलता वो टेढ़ी चाल है 
आज उस कायर का 
बनना हमको काल है 


उसको काट गिराना है 
झूठा अभिमान मिटाना है 
मत रोक हमें अब दुल्हन ...मत रोक 
मुश्किल अब रुक पाना है .

कितनी कोख उजाड़ी हैं ?
कितने छीने हैं भाई ?
सूनी करी कितनी मांगें ?
खुशियों में सेंध लगाई है 


सबका सबक सिखाना है 
सैनिक धर्म निभाना है 
मत रोक हमें अब बेटी .....मत रोक 
मुश्किल अब रुक पाना है .


                               जय हिंद !
                             शिखा कौशिक 
                       [विख्यात ]
[सभी फोटो गूगल से साभार ]


सोमवार, 21 नवंबर 2011

जो बिछड़ जाते हैं .


जो  बिछड़  जाते  हैं  ..मेरी आवाज में 
जो बिछड़ जाते हैं हमेशा के लिए 
छोड़ जाते हैं बस यादों के दिए 
जिनकी रौशनी में उनका साथ पाते हैं 
वो नहीं आयेंगे ये भूल जाते हैं .

जिन्दगी कितने काँटों से है भरी 
हर दिन कर रही हम सब से मसखरी 
जो चला था घर से मुस्कुराकर  के अभी 
एक हादसा हुआ और आया न कभी 
साथी राहों में ऐसे ही छूट जाते हैं 
वो नहीं आयेंगे ये भूल जाते हैं .

रोज सुबह होती और शाम ढलती है 
जिन्दगी की यू ही रफ़्तार चलती है 
वो सुबह और शाम कितनी जालिम है 
जब किसी अपने की साँस थमती है 
हम ग़मों की आग में जिन्दा जल जाते हैं .
वो नहीं आयेंगे ये भूल जाते हैं .
              शिखा कौशिक 

गुरुवार, 17 नवंबर 2011

वृक्ष की पुकार !

वृक्ष की पुकार !






वृक्ष करता है पुकार 
न जाने कितनी बार ?
हे मानव !तुमने इस निर्मम कुल्हाड़ी से 
मुझ  पर किया वार .



अब तक सहता रहा मैं 
तुम्हारा अत्याचार                           

तुम करते रहे मुझ से नफरत 
मैं करता रहा तुम से प्यार .

मैं देता तुम्हे ऑक्सीजन 
जिससे तुम्हे मिलता जीवन 
हटा कर प्रदूषण 
स्वच्छ बनता पर्यावरण .

यदि मैं न होता तो 
होती  ये  भूमि  बेकार  
तब  होती न फसल  
और  न होता व्यापार  

इस देश की जनसँख्या है अपार 
उसके लिए लाते कहाँ से खाद्यान 
का भंडार ?

'कहते हैं प्रकृति माँ है !
और इन्सान उसका बेटा है '
माँ सदा देती है प्यार 
पर बेटा करता उसी पर अत्याचार !

वृक्ष आगे बताता है 
क्यों वह हरा सोना कहलाता है?

मिटटी का कटाव कम कर 
उपजाऊपन  बढाता हूँ ;

वायु मंडल को नम कर 
वर्षा भी करवाता हूँ ;

औषधियां देकर 
राष्ट्रीय आय बढाता हूँ ;
लकड़ी देकर अनेक व्यापार 
चलवाता हूँ , 

बेंत;चन्दन,कत्था   ,गोंद  
इनसे चलते  हैं जो  व्यापार 
वे  ही  तो है देश की प्रगति  
का आधार  .

बाढ़ जब आती है 
सारा पानी पी जाता हूँ ;
देश को लाखों की हानि
 से बचाता हूँ .


भूमि के अन्दर का 
जल  -स्तर   ऊंचा  करता जाता हूँ 
रेगिस्तान के विस्तार पर 
मैं ही तो रोक लगाता   हूँ .

ईधन,फल -फूल ;चारा 
मैं ही तो देता हूँ 
लेकिन कभी तुमसे 
कुछ नहीं लेता हूँ 

 
यद्  रख मानव यदि तू 
मुझको काटता जायेगा 
तो तू अपने जीवन को भी 
नहीं बचा पायेगा ;
ऑक्सीजन;फल-फूल;औषधियां 
कहाँ से लायेगा ?

किससे फर्नीचर ;स्लीपर 
रेल के डिब्बे बनाएगा ?

न जाने कितने उद्योग 
मुझ पर हैं आधारित ?
उन्हें कैसे  चलाएगा ?
ये सब जुटाते-जुटाते 
क्या तू अपना अस्तित्व 
बचा पायेगा ?

कार्बन डाई ऑक्साइड  का काला बादल
जब आकाश में छाएगा 
तब हे मानव ! तुझे अपना 
काल स्पष्ट नज़र आएगा . 

 तुम्हारी होने वाली 
संतानों में कोई 
देख;सुन;चल नहीं पायेगा
उस समय उनके लिए 
वस्त्र,आहार 
कहाँ से लायेगा ?


हे मानव !मुझे अपने नष्ट 
होने का डर नहीं है ,
मुझे डर है कि मेरे 
नष्ट होने से 
तू भी नष्ट हो जायेगा !
तू भी नष्ट हो जायेगा !
तू भी नष्ट हो जायेगा !

                            शिखा कौशिक 
[sabhi photo 'foto search ]


रविवार, 6 नवंबर 2011

हे देव !! जाग जाइये ! जाग जाइये !!


हे देव !! जाग जाइये ! जाग जाइये !!


हे लक्ष्मीपति   !   हे श्री नारायण  !
आज कार्तिक-मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी है;
चार मास   व्यतीत हुए;
शयन-समय समाप्त हुआ;
हे सृष्टि के पालनहार !
जाग जाइये !जाग जाइये!!
****************  ******************
असुरों क़ा संहार करिए;
हम सबका उद्धार करिए;
मिटा दीजिये अज्ञान-तम;
जीव-जगत को बना दीजिये सुदरतम;
कल्याण कीजिये  !!
हे करुणासागर  !!
जाग जाइये ! जाग जाइये!
**************  ****************
हम जानते है!
आपकी निद्रा ''योग-निद्रा'' थी;
जिसमे आप अंतस में
निहार रहे थे सम्पूर्ण  ब्रह्माण्ड   को ;
करते थे नियोजन तब भी;
प्रभु बलि के द्वार से
अर्थात  पाताल-लोक से
लौट आइये !
हे देव !! जाग जाइये ! जाग जाइये !!