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शुक्रवार, 1 अक्तूबर 2010

poem-rajtilak

उषा काल
उदित hota dinkar;
neelambar lalima liye;
pakshiyon ka कलरव;
मंदिरों की घंटियों
की मधुर ध्वनि;
मनभावन वातावरण
शीतल पवन का स्पर्श
तन में तरंग;
मन में उमंग.
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madhayhan का समय
जीवन में गति;
चारों or गाडियों
का शोर;
उड़ता धूओं और धूल;
अशांति का साम्राज्य.
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सयान्तिका का आगमन
लौटते घर को
क़दमों की आवाज;
शांत जल
टिमटिमाते तारों का समूह;
सुगन्धित समीर;
निशा - सुंदरी का
राजतिलक.

1 टिप्पणी:

shikha kaushik ने कहा…

a very real description of a day .i realy impressed. lage raho ....lage raho......
shalini kaushik