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सोमवार, 4 अक्तूबर 2010

poem-DOBARA -PRAYAS

अब मैं कभी नहीं रोउंगी ;
अब मैं कभी निराश न houngi ;
गम जितने देने हो दे दे;
अब मैं कभी उदास न houngi*****
कभी थमेंगे नहीं ये हाथ;
पग बढ़ते जायेंगे आगे ;
बाधाओं की आग में जलकर ;
भले मैं बन जाऊं एक राख;
अब कभी दिल न टूटेगा
दिल में न कोई टीस ही होगी.******
हर आशा को मन में रखकर;
प्रतिपल उसका ध्यान रखूंगी;
न घुटने दूंगी अभिलाषा;
संघर्षों से पूरी करुँगी;
और अगर पूरी न हुई तो
दोबारा प्रयास करुँगी.
अब मैं कभी निराश न होउंगी.

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