शत शत नमन सद्गुरु के चरणों में !

सद्गुरु के चरणों में हम शीश धरते हैं
श्रद्धा अवनत होकर प्रणाम करते हैं .
आपने हरा अज्ञान का है तम
पूजनीय हैं आप सर्वप्रथम
आपकी महिमा का गुणगान करते हैं
श्रद्धा अवनत होकर प्रणाम करते हैं .
सत्य का पथ आपने दिखाया
माया मोह के जाल से बचाया
करबद्ध हो सम्मान करते हैं
श्रद्धा अवनत होकर प्रणाम करते हैं .
पग पग पर परे किया निर्देशन
अहर्निश हमारा किया मार्गदर्शन
आप हैं महान विद्यादान करते हैं
श्रद्धा अवनत होकर प्रणाम करते हैं .
आपको करते हैं शत शत नमन
आपने सँवारा हमारा जीवन
आप जैसे गुरु पर अभिमान करते हैं
श्रद्धा अवनत होकर प्रणाम करते हैं .
शिखा कौशिक

जीवन में ह्रदय के उदगार विभिन्न रूप में प्रकट होते हैं.कभी कहानी कभी कविता से भरा ये ब्लॉग.....
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रविवार, 2 सितंबर 2012
गुरुवार, 30 अगस्त 2012
मेरे शहर में ....मेरे देश में ...मेरी दुनिया में.. मेरे घर से ज्यादा क्या खूबसूरत हो सकता है !
ये बेशकीमती है ; ये मेरी दुनिया है ,
ये मेरा घर है ,ये ही मेरी दौलत है .
कितनी महफूज़ हूँ इसके आँगन की बांहों में ;
ये मेरा घर है ,ये ही मेरी अस्मत है .
पाक चौखट है इसकी ; मेरा इबादतखाना है ,
ये मेरा घर है , ये ही मेरी मन्नत है .
यहाँ बसी हैं बचपन की सारी यादें कोने कोने में ;
ये मेरा घर है ,ये ही मेरी किस्मत है .
ना दूर रहकर इससे दिल को सुकून आता है ,
ये मेरा घर है ,ये ही मेरी ज़न्नत है .
शिखा कौशिक ''नूतन ''
रविवार, 26 अगस्त 2012
धिक्कार इस जनतंत्र पर !
धिक्कार इस जनतंत्र पर !
है विषमता ही विषमता
जाती जिधर भी है नज़र ,
कारे खड़ी गैरेज में हैं
और आदमी फुटपाथ पर .
एक तरफ तो सड़ रहे
अन्न के भंडार हैं ,
दूसरी तरफ रहा
भूख से इंसान मर
है विषमता ही विषमता
निर्धन कुमारी ढकती तन
चीथड़ों को जोड़कर
सम्पन्न बाला उघाडती
कभी परदे पर कभी रैंप पर
है विषमता ही विषमता
मंदिरों में चढ़ रहे
दूध रुपये मेवे फल ,
भूख से विकल मानव
भीख मांगे सडको पर
है विषमता ही विषमता
कोठियों में रह रहे
कोठियों में रह रहे
जनता के सेवक ठाठ से ,
जनता के सिर पर छत नहीं
धिक्कार इस जनतंत्र पर !
शिखा कौशिक
शुक्रवार, 24 अगस्त 2012
शुक्र मना बिटिया रानी !!!
शुक्र मना बिटिया रानी

शुक्र मना बिटिया रानी
लेने दिया हमने जन्म तुझे ;
वरना निपटाते कोख में ही
क्यों बात नहीं तू ये समझे ?
शुक्र मना बिटिया रानी
तेरा ब्याह किया दहेज़ दिया ;
तेरी खातिर तेरे बाप ने है
अपमान का कितना गरल पिया !
शुक्र मना बिटिया रानी
शुक्र मना बिटिया रानी
पतिदेव ने केवल पीट दिया ;
कितने पतियों ने पत्नी को
निज अहम् की आग में झोंक दिया .
शुक्र मना बिटिया रानी
तू मरी सुहागन दुनिया में ;
जीवन भर किया ज़लील तुझे
पर श्राद्ध किया बड़ी श्रद्धा से !!!
SHIKHA KAUSHIK
मंगलवार, 21 अगस्त 2012
पुरुष सदा निर्दोष -एक सार्वभौमिक सत्य
पुरुष सदा निर्दोष -एक सार्वभौमिक सत्य

देवी सीता का हुआ हरण




देवी सीता का हुआ हरण
इसके पीछे था क्या कारण ?
स्त्री बोली - था नीच अधम
लंका का राजा वो रावण
पर पुरुष का है भिन्न मत
उसने ढूँढा स्त्री मे दोष
बोला एक पक्ष है अनदेखा
क्यों लांघी सीता ने
लक्ष्मण -रेखा ?
चीर हरण कृष्णा का हुआ
क्यों हुआ कहो इसका कारण ?
स्त्री बोली -पुरुषों के खेल
सदियों से नारी रही झेल ,
पर पुरुष का है भिन्न मत
उसने ढूँढा स्त्री का दोष
कृष्णा वचनों की कटु चोट
दुर्योधन उर को रही कचोट
कृष्णा का दोष था इसमें साफ़
कौरव कर देते कैसे माफ़ ?
फिजा की निर्मम हत्या और
गीतिका की आत्महत्या
दोनों में दोषी है कौन ?
कहो जरा मत रहो मौन ,
स्त्री बोली-शोषण आग में वे जल गयी
मक्कार पुरुष से छली गयी ,
पर पुरुष का है भिन्न मत
उसने ढूँढा स्त्री में दोष
दोनों क्या बच्ची थी अबोध
यथार्थ का नहीं था बोध ?
उड़ने के जोश में खोये होश
क्यों रही शोषण पर खामोश ?
परिवार पिता भाई माता
सबका इसमें दोष है
चाँद और गोपाल तो
बन्दे बिल्कुल निर्दोष हैं !!!
शिखा कौशिक
[नूतन ]
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