ये बेशकीमती है ; ये मेरी दुनिया है ,
ये मेरा घर है ,ये ही मेरी दौलत है .
कितनी महफूज़ हूँ इसके आँगन की बांहों में ;
ये मेरा घर है ,ये ही मेरी अस्मत है .
पाक चौखट है इसकी ; मेरा इबादतखाना है ,
ये मेरा घर है , ये ही मेरी मन्नत है .
यहाँ बसी हैं बचपन की सारी यादें कोने कोने में ;
ये मेरा घर है ,ये ही मेरी किस्मत है .
ना दूर रहकर इससे दिल को सुकून आता है ,
ये मेरा घर है ,ये ही मेरी ज़न्नत है .
शिखा कौशिक ''नूतन ''
