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शुक्रवार, 29 जून 2012

जिसमे न हो बड़प्पन वो कैसा बड़ा है !

जिसमे न हो बड़प्पन वो कैसा बड़ा है !

पत्थर ही मारना है तो देख ले पहले;
जो सामने खड़ा है वो शख्स कौन हैं ?

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ;
फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है ?

जिसमे न हो बड़प्पन वो कैसा बड़ा है !
ये रूप है बड़ो का तो बच्चा कौन है ?

हमको तो गिना दी हमारी खताएं सब ;
पर अपनी एक खता भी देखता कौन है ?

लो ख़त्म हुआ आज से सलाम व् दुआ ;
मुश्किल है अब पहचानना कि कौन कौन है ?
शिखा कौशिक




शनिवार, 10 मार्च 2012

ये सोच के सिर झुक जाता है




दंगों  की आड़  में  औरत  की  अस्मत  को  लूटा  जाता है ;
हम कुछ भी न कर पाते हैं ये सोच के सिर झुक जाता है !


जब  सच्चाई  को  ट्रेक्टर  से  कुचला  जाता  है 
हम  कुछ  भी  न  कर  पाते  हैं   ये  सोच  के  सिर   झुक  जाता  है !

 
 
सोती जनता को रातों   में लाठी से पीटा   जाता है ;
                                       हम कुछ भी न कर पाते हैं ये सोच के सिर झुक जाता है !
                                                                  
                                                            


                                         जनता  भूखी -नंगी  बैठी और  पार्क बनाया  जाता है ;
                                              हम कुछ भी न कर पाते हैं ये सोच के सिर झुक जाता है !

GOOGLE से साभार 
                                      पैसे देकर अख़बारों  में झूठा सच्चा  छप जाता है ;
                                      हम कुछ भी न कर पाते हैं ये सोच के सिर झुक जाता है !
                                                                        
                                                     शिखा  कौशिक 

गुरुवार, 8 मार्च 2012

माँ-बाप को ही दे दिया इतना बड़ा धोखा !



माँ-बाप जिन बच्चों को नाज़ों से पालते ;
होकर बड़े क्यों वे उन्हें घर से निकलते ?

बचपन में जिनसे पूछकर करते थे सभी काम ;
होकर बड़े उन्ही में कमियां निकालते !

लाचार हैं;बेबस हैं;किसी काम के नहीं  ;
कहकर ये बात जले पर नमक हो डालते !

अपने तो शौक करते हो शान  से पूरे ;
माँ-बाप के हर काम को कल पर टालते !

माँ-बाप को ही दे दिया इतना बड़ा धोखा ;
जो  उम्रभर  रहे  तुमको  सँभालते  !

                                  शिखा कौशिक 


 

शुक्रवार, 6 जनवरी 2012

बीवी और शौहर


बीवी और शौहर 




रात भर जागी  बीवी दर्द से जो तडपा शौहर ;
कभी बीवी के लिए क्यों नहीं जगता शौहर ?


करे जो काम बीवी फ़र्ज़ हैं उसको कहते ;
अपने हर एक काम को अहसान क्यों कहता शौहर ?


रहो हद में ये हुक्म देता बीवी को ;
मगर खुद पर कोई बंदिश नहीं रखता शौहर .


नहीं है हक़ बीवी को उठा के देख ले आँखें ;
जरा सी बात पर क्यों हाथ उठाता शौहर ?


शौहर के लिए दुनिया छोड़ देती बीवी ;
दुनिया के कहने पर उसी को छोड़ता शौहर .


                                    शिखा कौशिक 
                           [विख्यात ]