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रविवार, 15 जुलाई 2012

ले कावड चल हरिद्वार चल ....


ले कावड चल हरिद्वार चल ....
File:Har-ki-Pauri during Kavad Mela, Haridwar.jpg
[google se sabhar ]
ले कावड चल हरिद्वार चल ;
हरिद्वार से ला गंगा जल ,
गंगा जल  शिवलिंग  पर  चढ़ाना  ;
मन की मुरादें शिव से पाना .
ले कावड चल हरिद्वार चल ....
सब मासों में  मास निराला ;
श्रावण मास है शिव को प्यारा ,
शिव महिमा जो इसमें गाता ;
मन चाहा वर  शिव से पाता   ,
शिव चरणों में शीश झुकाना  .
मन की मुरादें शिव से पाना ;
ले कावड चल हरिद्वार चल !
शिव मेरा भोला भंडारी ;
हर लेता विपदाएं भारी ,
ये हैं आदिदेव कामारि ;
ये शंकर ये हैं त्रिपुरारी  ,
बम  भोले कह गगन  गुंजाना .
मन की मुरादें शिव से पाना .
ले कावड चल हरिद्वार चल ....
  
                                                    जय गौरी शंकर की !
                 शिखा कौशिक 


2 टिप्‍पणियां:

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

बिसम दाह तिहुँपुर के धारि कंठ नील भयो
धीर-गंभीर चंद्रमौलि वे दिगंबरा !
उनही के चाहे जन्म-मृत्यु के विधान भये
विगत मान आत्मरूप धारे विशंभरा
तिनही के माथ जल डारन के काज हेतु
साधन बनायो तुहै धन्य रे कँवरिया !
- प्रतिभा.

शालिनी कौशिक ने कहा…

.सुन्दर प्रस्तुति.बधाई . अपराध तो अपराध है और कुछ नहीं ...