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मंगलवार, 10 जुलाई 2012

शिव शंकर को लगते हैं कावड़ये सबसे प्यारे !


शिव शंकर को लगते हैं कावड़ये  सबसे प्यारे !




File:Har-ki-Pauri during Kavad Mela, Haridwar.jpg
हमको गौरा प्यारी है  गौरा को शिव हैं  प्यारे ;
शिव शंकर को लगते हैं कावड़ये  सबसे प्यारे !
करते हैं स्वयं सुरक्षा पग  पग पर  कावड़यों   की ;
भर देते उनमे शक्ति  आगे बढ़ते रहने की ;
जय  शिव शंकर की कहते ही  मिटते  कष्ट हैं सारे !
                             जय गौरीनाथ की !
                           शिखा कौशिक                        

रविवार, 1 जुलाई 2012

स्त्री की जय जयकार लिखो !

स्त्री की  जय जयकार लिखो !





अब  नख -शिख  वर्णन छोड़ कवि ;
स्त्री मेधा पर छंद रचो ,
मांसल श्रृंगार अभिव्यक्ति छोड़ ;
स्त्री -उर  की कुछ व्यथा लिखो .

अब नहीं नायिका वो नारी ;
जिसका अंग-अंग अति सुन्दर हो  ,
ये  युग सशक्त नारी का है ;
बढ़ता  उसका  सम्मान  लिखो .
अब नयनों के तीर नहीं चलते ;
प्रज्ञा से करे पराजित है ;
मत  अधर -लालिमा में उलझो     
मन  में  उठता  कुछ  ज्वार  लिखो   .
अब नहीं विरह गीतों का युग ;
न विरह ताप में वो झुलसे ,
प्रतिबद्ध  है ज्ञानार्जन को ;
बढ़ते क़दमों की चाल  लिखो .
Hand : Group of hand and fist lift up high on white background


अब नहीं विलास -  वस्तु  नारी   ;
न केवल  कोमल  देह मात्र ,
स्त्री ने पृथक अस्तित्व रचा  ;
तुम  उसकी जय जयकार लिखो .

                                         शिखा कौशिक 
[विख्यात ]

[सभी चित्र गूगल से साभार  ]

शुक्रवार, 29 जून 2012

जिसमे न हो बड़प्पन वो कैसा बड़ा है !

जिसमे न हो बड़प्पन वो कैसा बड़ा है !

पत्थर ही मारना है तो देख ले पहले;
जो सामने खड़ा है वो शख्स कौन हैं ?

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ;
फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है ?

जिसमे न हो बड़प्पन वो कैसा बड़ा है !
ये रूप है बड़ो का तो बच्चा कौन है ?

हमको तो गिना दी हमारी खताएं सब ;
पर अपनी एक खता भी देखता कौन है ?

लो ख़त्म हुआ आज से सलाम व् दुआ ;
मुश्किल है अब पहचानना कि कौन कौन है ?
शिखा कौशिक




गुरुवार, 28 जून 2012

नाम ''पकिस्तान'' है मगर पाकीज़गी का नाम नहीं !

नाम ''पकिस्तान''  है मगर  पाकीज़गी  का नाम नहीं !



[ my voice]




पाकिस्तान की जेल  में बंद  भारतीय कैदी सरबजीत की रिहाई पर बुधवार शाम से शरू पाकिस्तान के नाटक ने सरबजीत के परिवार के साथ साथ करोड़ों भारतीयों की भावनाओं का भी मखौल उड़ाया है . ह्रदय मे  भर आये   आक्रोश  को  इन  शब्दों में  प्रकट करने का प्रयास किया  है  -

तू  जो  कहता  है  तेरी बात पर यकीन नहीं ;
नाम ''पकिस्तान''  है मगर  पाकीज़गी  का नाम नहीं .

तेरी मक्कारियों  के  ज़ख्म  अभी  ताज़ा  हैं  ;
तेरे जैसा ज़माने में तमाशबीन    नहीं .


तू है खादिम  मगर खुद  को समझता  है खालिक  ;
ख़बीस  देख  तेरे पैरों  तले   ज़मीन   नहीं .

ख़निल  तेरी जगह  दोजख़  में बड़ी पक्की है ;
वैसे  दोजख़   भी  इससे  बड़ी तौहीन नहीं .

देखकर   दर्द औरों के बड़ा हँसता   है ;
रीआइ  मौत  पर तेरे होगा  कोई ग़मगीन नहीं .


[ख़निल-सेंधमार  चोर  , खालिक-ईश्वर  ,रिआइ-मक्कार ]

                                  शिखा कौशिक 

सोमवार, 25 जून 2012

पापा तुम सिगरेट क्यों पीते हो ?




पापा  तुम  सिगरेट क्यों पीते  हो ?
LEAVE SMOKING BEFORE YOUR CHILDREN ASK YOU -



कश लेकर  धुँआ छोड़ देते हो 
सांसों  में  हमारी  जहर  घोल  देते हो ;
पापा  तुम  सिगरेट क्यों पीते  हो ?

सिगरेट  से हो जाता  कैंसर  
है  ये  बीमारी  भयंकर  
सेहत  से क्यों अपनी  खिलवाड़  करते  हो ?
पापा  तुम  सिगरेट क्यों पीते  हो ?

मेहनत  से पैसा कमाते हो 
क्यों धुएं  पर उड़ाते   हो ?
समझाने  पर ना  समझते हो .
पापा  तुम  सिगरेट क्यों पीते  हो ?

अब  तो रखो ख्याल 
छोड़ दो  धूम्रपान 
टोकने पर ऐसे क्यों बिगड़ते हो?
पापा  तुम  सिगरेट क्यों पीते  हो ?
                                                       SHIKHA KAUSHIK