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गुरुवार, 2 जून 2011

हम सब की माएं

ये ऐसा बंधन है कभी टूट नहीं सकता ,
ये ऐसी दौलत है कोई लूट नहीं सकता ,
जीवन भर देती हम सबको दुआएं 
हम सब की माएं ;हम सबकी माएं.
वो अपना निवाला बच्चे  को दे देती ,
बदले में बच्चे  से भला माँ है क्या लेती ?
अपने पर ले लेती वो सारी बलाएँ ,
हम सबकी माएं,हम सब की माएं 

जो भटके कभी हम वो राह दिखाती,
जीने का सलीका माँ ही तो सिखाती 
ममता के मोती बच्चों पे लुटाएं ,
हम सबकी माएं.हम सबकी माएं .

जो गोद में लेकर रोते को हँसाती;
जो ऊँगली पकड़कर चलना है सिखाती ,
जो खुद जगती रहकर बच्चे को सुलाएं 
हम सब की माएं ,हम सबकी माएं .  
                                                      शिखा कौशिक 

5 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

bahut khoob .aapne ham sabhi kee maa ko yahan samman de sarahniy karya kiya hai.aapki aawaz me ye song bahut achchha laga.badhai.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर!

Richa P Madhwani ने कहा…

http://shayaridays.blogspot.com

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत बढ़िया .....सुंदर रचना