समर्थक

मंगलवार, 11 जनवरी 2011

samay

कुछ छूटता -सा
दूर जाता हुआ
बार-बार याद आकर
रुलाता -सा;
क्या है?
मै नहीं जानती.
कुछ सरकता -सा
कुछ बिखरता -सा
कुछ फिसलता -सा
कुछ पलटता -सा;
क्या है?
मै नहीं जानती.
कंही ये 'समय' तो नहीं-
जो प्रत्येक पल के साथ
पीछे छूटता;
हर कदम के साथ
दूर होता;
जो बीत गया; उसे
पुन: पाने की आस में
रुलाता ;
धीरे-धीरे आगे बढता हुआ;
हमारे हाथों से निकलता हुआ;
कभी अच्छा ;कभी बुरा;
हाँ! ये वक़्त ही है-
मै हूँ इसे जानती!

4 टिप्‍पणियां:

यशवन्त माथुर ने कहा…

बेहतरीन!

shalini kaushik ने कहा…

bahut sundar bhavpoorn abhivyakti..

Anita ने कहा…

जिसे हम नहीं जानते वही बहुमूल्य है क्योंकि जीवन को दिशा वही देता है. समय को परखती सुंदर रचना !

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

अजब होते हैं समय के सारे रंग...... प्रभावी रचना