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शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

jeevan karm

हर  सुबह नई आशा  के साथ जागो;
 दिल में विश्वास रखो ऊपर वाले के प्रति;
गिरो अगर तो गिरकर संभालो खुद को;
जिन्दगी में जीत फिर तुम्हारी होगी!
ये मत सोचो क्या खो दिया;
रखो आशा कुछ पाने की;
मत रो अपनी विफलता पर ;
लिखो नयी इबारत कामयाबी की!
संघर्षो की राह पर चलकर  ;
मंजिल पालो सपनो की;
गम की गर्मी में तपकर ही
मिलेंगी सांसे राहत की!
जीवन कर्म का स्थल है;
आराम  यहाँ  कहाँ  करना  है;
निज  प्रयास
की क्यारी  को खुशियों  के फूलो 
 से  भरना  है !

7 टिप्‍पणियां:

यशवन्त माथुर ने कहा…

बहुत ही अच्छा सन्देश देती कविता.

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मैं नेता हूँ

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत प्रेरणादायी रचना है.....

Anita ने कहा…

प्रेरणादायक कविता !

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

हौसले जगाती कविता भाव पूर्ण कविता !

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

हौसले जगाती भाव पूर्ण कविता !

यशवन्त माथुर ने कहा…

आप सब को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं.
सादर
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गणतंत्र को नमन करें

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

र सुबह नई आशा के साथ जागो;
दिल में विश्वास रखो ऊपर वाले के प्रति;
गिरो अगर तो गिरकर संभालो खुद को;
जिन्दगी में जीत फिर तुम्हारी होगी!

आशा का संचार करती नज़्म .....!!