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बुधवार, 1 दिसंबर 2010

bas itna jaan le ..

सपने न देख सतरंगी
ए मेरे दोस्त !
इस दुनिया  क़ा रंग काला है
बस इतना जान ले !
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ह्रदय की भव्यता क़ा
कोई मोल  नहीं ;
पैसे क़ा बोलबाला है ;

बस इतना जान ले !
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न मांग कुछ भी
भिखारी बनकर ;
गुंडों क़ा बोलबाला है ,
बस इतना जान ले !
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4 टिप्‍पणियां:

ana ने कहा…

कवित बहुत सुन्दर बन पडा है ये भी जान लें …

यशवन्त ने कहा…

बेहतरीन!

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

ह्रदय की भव्यता क़ा
कोई मोल नहीं ;
पैसे क़ा बोलबाला है ;
बस इतना जान ले !

Bahut khoob...... Sateek rachna...

नरेश सिह राठौड़ ने कहा…

कड़वे यथार्थ का बोध कराती रचना है |