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गुरुवार, 30 अगस्त 2012

मेरे शहर में ....मेरे देश में ...मेरी दुनिया में.. मेरे घर से ज्यादा क्या खूबसूरत हो सकता है !



ये बेशकीमती है  ; ये मेरी दुनिया है ,
ये मेरा घर है ,ये ही मेरी दौलत है .

कितनी महफूज़ हूँ इसके आँगन की बांहों में ;
ये मेरा घर है  ,ये ही मेरी अस्मत  है .

पाक चौखट है इसकी ;  मेरा इबादतखाना है  ,
ये मेरा घर है  , ये ही मेरी मन्नत है .

यहाँ बसी हैं बचपन की सारी यादें कोने कोने में ;
ये मेरा घर है ,ये ही मेरी किस्मत है .

ना दूर रहकर इससे दिल को सुकून आता है ,
ये मेरा घर है  ,ये ही मेरी ज़न्नत है .
                                             शिखा कौशिक ''नूतन ''

4 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

most beautiful place on this earth .सार्थक प्रस्तुति .कैराना उपयुक्त स्थान :जनपद न्यायाधीश शामली :

Anil Singh ने कहा…


behtareen prastuni,ghar ghar hi hota hai,puri jindgi ke safar ki dastan

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (01-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Aditipoonam ने कहा…

इस सुंदर रचना के लिए बधाई