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सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

मेरे माँ -बाप है या ...फ़रिश्ते हैं !

ग़मों की आग में जलते हैं मगर हँसते हैं ;
मेरे माँ-बाप हैं या वो कोई फरिश्ते हैं .

किसी आफत की आंच भी नहीं आने देते ;
उनके साये में हम चैन से सो लेते हैं .

लुटा देते हैं हम पर ही जिन्दगी सारी ;
हमी संग हँसते हैं ,संग ही रो लेते हैं .

हमारी हर जरूरत क़ा वो कितना ख्याल रखते हैं ;
हमारे वास्ते आराम अपना छोड़ देते हैं .

हमे गर्मी की,बारिश की ,न जाड़े की हुई चिंता ;
हरेक मौसम को आगे बढकर वो खुद झेल लेते है .

हमारी बेतुकी बातों पर कितना ध्यान देते हैं ;
हमारे सब सवालों क़ा जवाब ढूंढ   लेते है .

सलीके से करो सब काम ,तरीका भी बताते हैं ;
उन्ही के साथ रहकर हम लियाकत सीख लेते हैं .

10 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

maa baap ke tyag ko varnit karti bahut sundar bhavabhivyakti...

Atul Shrivastava ने कहा…

अच्‍छी और भावपूर्ण रचना। सच में मां बाप अपने बच्‍चों के लिए क्‍या कुछ नहीं करते। किसी ने कहा भी है, भगवान ने दुनिया बनाई और दुनिया में इंसान को बनाया। हर इंसान के पास वह खुद नहीं रह सकता इसलिए उसने मां को बनाया।
आपको अच्‍छी पोस्‍ट के लिए बधाई।

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

हमेशा भला ही चाहते हैं माता पिता..... उन्हें नमन
बहुत सुंदर

चैतन्य शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर........ आज के दिन आपको मेरी प्यार भरी शुभकामनायें

यशवन्त माथुर ने कहा…

क्या खूब कहा शिखा जी!

सच में माँ -बाप से अच्छा मार्गदर्शक कोई नहीं होता.

वन्दना ने कहा…

बहुत सुन्दर ख्यालों को संजोया है……………माता पिता के लिये बहुत गहरे जज़्बात हैं …………इन्हे बनाये रखना।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर गजल!

Kunwar Kusumesh ने कहा…

सच में मां बाप अपने बच्‍चों के लिए क्‍या कुछ नहीं करते।
आपको अच्‍छी पोस्‍ट के लिए बधाई।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

हर माता पिता अपने बच्चों के लिए यही सब करते हैं ...बहुत खूबसूरती से आपने इसे अभिव्यक्त किया

rahul (aadi) vishwakarma ने कहा…

मेरी सबसे एक ही विनती है की जिंदगी मैं हर चीज़ दुवारा मिल जाती है पर माँ बाप दुवारा नहीं मिलते हर बात को तुम भूलो मगर माँ बाप को मत भूलना