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गुरुवार, 3 जनवरी 2013

''अमर प्रेम '' का ''भाव'' ही आधार !!

अमर प्रेम का आधार ''भाव''
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तुम्हारे नयनों में
समस्त सृष्टि के लिए स्नेह ,
तुम्हारे अधरों पर
मंगलमयी पवित्र मुस्कान ,
तुम्हारे कर-पल्लवों  के
स्पर्श में है ममत्व ,
हे कल्याणी !
तुम्हारी देह से नहीं  आकर्षित ,
तुम्हारे भावों से हूँ  प्रभावित ,
स्नेह ,ममता और आह्लादित करने वाले
तुम्हारे भावों ने रख दी है नींव मेरे ह्रदय में
''प्रेम'' की !


तुम्हारे उर में उमड़ती
जगत की पीड़ा हरने वाली भावना ,
असीम कष्टों को सहज व् मूक होकर झेलना ,
रूप-गुण संपन्न व्यक्तित्व से गंध हीन पुरुष जीवन
में सुगंध बिखेरना ,
हे ईशा !
 तुम्हारी देह से नहीं  आकर्षित ,
तुम्हारे भावों से हूँ  प्रभावित ,
 कष्टहारिणी ,सहनशील व् सुगन्धा नारी
तुम्हारे भावों ने रख दी है नींव मेरे ह्रदय में
''प्रेम'' की !


शुचि स्मिता नारी ने
बल संपन्न ,गुण -ग्राही
पुरुष का प्रणय निवेदन
तब किया स्वीकार ,
नारी-पुरुष संयोग से सृष्टि
का हुआ विस्तार ,
ये कहानी प्रेम की ,
ये ही इसका सार ,
''अमर प्रेम '' का ''भाव''  ही आधार !!
      
                  शिखा कौशिक ''नूतन ''


5 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

बिलकुल सही बहुत सही बात कही है आपने .सार्थक भावनात्मक अभिव्यक्ति मरम्मत करनी है कसकर दरिन्दे हर शैतान की #

रविकर ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति |
बधाई डा. शिखा ||

Anita ने कहा…

तुम्हारे नयनों में
समस्त सृष्टि के लिए स्नेह ,
तुम्हारे अधरों पर
मंगलमयी पवित्र मुस्कान ,
तुम्हारे कर-पल्लवों के
स्पर्श में है ममत्व ,

नारी हृदय की कोमल भावनाओं का सुंदर चित्रण..

Rajendra Kumar ने कहा…

बहुत ही सुंदर मार्मिक प्रस्तुती,धन्यबाद।
राजेन्द्र ब्लॉग

Onkar ने कहा…

सुन्दर रचना