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शनिवार, 14 अप्रैल 2012

जिन्दगी में जीत फिर तुम्हारी होगी!


हर  सुबह नई आशा  के साथ जागो;
 दिल में विश्वास रखो ऊपर वाले के प्रति;
गिरो अगर तो गिरकर संभालो खुद को;
जिन्दगी में जीत फिर तुम्हारी होगी!


ये मत सोचो क्या खो दिया;
रखो आशा कुछ पाने की;
मत रो अपनी विफलता पर ;
लिखो नयी इबारत कामयाबी की!


संघर्षो की राह पर चलकर  ;
मंजिल पालो सपनो की;
गम की गर्मी में तपकर ही
मिलेंगी सांसे राहत की!


जीवन कर्म का स्थल है;
आराम  यहाँ  कहाँ  करना  है;
निज  प्रयासकी क्यारी को 
खुशियों  के फूलो  से  भरना  है !


                             शिखा कौशिक 
                      [विख्यात ]

3 टिप्‍पणियां:

Kailash Sharma ने कहा…

सकारात्मक सोच लिये बहुत प्रेरक प्रस्तुति ...

S.N SHUKLA ने कहा…

saarthak rachana, badhai.

Anita ने कहा…

संघर्षो की राह पर चलकर ;
मंजिल पालो सपनो की;
गम की गर्मी में तपकर ही
मिलेंगी सांसे राहत की!

अंतर में बहुत सुंदर भाव और जोश भरती कविता...