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सोमवार, 16 जनवरी 2012

राधे तूने मुरली..............


राधे  तूने मुरली  क्यूँ है  चुराई  ?
लगती  है  भोली पर करे  चतुराई   
राधे तूने ................

माता जसोदा के लल्ला सुनो 
जो कुछ भी पूंछूं सच सच कहो 
इसमें ही कान्हना  है तेरी भलाई !
राधे तूने .....



किसने सिखाया मीठी मुरली बजाना ?
घर घर में जाकर माखन चुराना ;
किसने तुम्हे ये मोहनी सिखाई ?
राधे तूने .......................



कोयल से सीखा है मुरली बजाना ,
सिखलाते मित्र  मुझे माखन चुराना ,
तुमने ही मुझको ये मोहनी सिखाई 
राधे तूने ..............



भोला  नहीं तू सीधा नहीं है ;
गोपियों की मटकी फोड़े तू ही है ,
कैसे करे तू इतनी ढिठाई ?
राधे तूने .....


राधे सुनो इन प्रश्नों को छोडो ,
लीला हमारी है परदे न खोलो ;
ढूंढ ली है मुरली जो थी छिपाई  
राधे तूने .........


                                  शिखा कौशिक 
                         [विख्यात ]



4 टिप्‍पणियां:

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बहुत ही बढ़िया।


सादर

सदा ने कहा…

अनुपम भाव संयोजन
कल 18/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, जिन्‍दगी की बातें ... !

धन्यवाद!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

वाह!
बहुत बढ़िया!
अपनी सुविधा से लिए, चर्चा के दो वार।
चर्चा मंच सजाउँगा, मंगल और बुधवार।।
घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी होगी!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सुन्दर रचना ..