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शनिवार, 27 अक्तूबर 2012

जो शहर के इश्क में दीवाने हो गए


'' जो शहर के इश्क में दीवाने हो गए ''


कस्बाई सुकून उनकी किस्मत में है कहाँ !
जो शहर के इश्क में दीवाने हो गए .
कैसे बुज़ुर्ग दें उन औलादों को दुआ !
जो छोड़कर तन्हां बेगाने हो गए .
दोस्ती में पड़ गयी गहरी बहुत दरार ,
हम तो रहे वही ; वो जाने-माने हो गए .
देखते ही होती थी  सब में दुआ सलाम ,
लियाकत गए सब भूल ;ये फसाने हो गए .
लिहाज के पर्दे फटे ; सब हो रहा नंगा ,
तहजीब ,शर्म , तमीज , अंधे -बहरे हो गए .
मासूमियत  में है मिलावट ; बच्चे हो रहे स्मार्ट ,
कहते हैं मत सिखाओं , तुम पुराने हो गए .
                                       शिखा कौशिक 'नूतन '

5 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

खुबसूरत प्रस्तुति |
बधाई बहना -

शालिनी कौशिक ने कहा…

बहुत सार्थक प्रस्तुति .आभार

Pallavi saxena ने कहा…

आजकल तो बच्चों मे स्मार्ट होने कि परिभाषा ही बदल गयी है सार्थक प्रस्तुति आभार....

Ravi Beck ने कहा…

कड़वी सच्चाई

सटीक प्रस्तुति

बढ़ गये वो
कदम बिना उठाये
आज दौड़ रहे है
जीते कप की कीमत क्या रह गयी है...


Ravi Beck ने कहा…

कड़वी सच्चाई

सटीक प्रस्तुति

बढ़ गये वो
कदम बिना उठाये
आज दौड़ रहे है
जीते कप की कीमत क्या रह गयी है...