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सोमवार, 22 अक्तूबर 2012

चौदह बरस वनवास काट राम बन कर देख !


चौदह बरस वनवास काट राम बन कर देख !


कैसे सहे जाते हैं होनी के लिखे लेख ?
चौदह बरस वनवास काट राम बन कर देख !

कैसे निभाते कुल की रीत ; प्रिय पिता से प्रीत ,
शांत कैसे करते हैं कैकेयी उर के क्लेश ?
चौदह बरस ....................



होना था जिस घड़ी श्री राम का अभिषेक ,
उसी घड़ी चले धर कर वो तापस वेश !
चौदह बरस ........................



कैसे चले कंटकमय पथ पर संग सिया लखन ?
काँटों की चुभन पर भरते न आह लेश !
चौदह बरस वनवास काट ......

कैसे भरत उर शांत किया चित्रकूट में ?
निज निज निभाओ धर्म सब देते हैं ये सन्देश .
चौदह बरस वनवास काट ........

पंचवटी में छल से सिया हरण , जटायु -मरण ,
कोमल ह्रदय श्री राम सहते कैसे ये वज्र ठेस ?
चौदह बरस वनवास काट ......





हनुमत से दास से मिलन , सुग्रीव -मित्रता ,
बालि का वध , चौमास ताप , सिया -स्मृति अनेक .
चौदह बरस वनवास .....

सिया सुधि , सेना -गठन , दक्षिण को फिर गमन ,
कैसे बना राम-सेतु  ? किया लंका में प्रवेश .
चौदह बरस ................

लंका पर चढ़ाई ,  कटा रावण-शीश ,
अग्नि-परीक्षा सीता की , हुए राम -सिया एक .
चौदह बरस ................



पुष्पक विमान पर चले फिर अवध की और ,
धीरज से काट दुःख के दिन देते प्रभु संकेत  .
चौदह बरस .......................
                               शिखा कौशिक 'नूतन'













4 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति.
दुर्गा अष्टमी की सभी को हार्दिक शुभकामनायें

Devdutta Prasoon ने कहा…

हैं वही अवतार जिसने 'दर्द' झेला |
निडर हो कर कंटकों से,और खेला ||

Devdutta Prasoon ने कहा…

है वही 'अवतार' जिसने 'दर्द' झेला |
निडर हो कर कंटकों से और खेला ||

ई. प्रदीप कुमार साहनी ने कहा…

आपकी पोस्ट बुधवार (24-10-2012) को चर्चा मंच पर । जरुर पधारें ।
सूचनार्थ ।