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रविवार, 11 मार्च 2012

भारत में लोकतंत्र है ?


कौन कह सकता भला भारत में लोकतंत्र   है ?
माफिया का राज अब  नित नया षड्यंत्र   है  .






जो गिरेबां  की तरफ बढ़ आये हाथ न्याय   का  ;
''काट दो उस   हाथ  को '' ये  अपराधियों  का  मन्त्र   है  .



जो  भी  ईमानदार हो उसको जला   दो  आग  में  ;
कुछ  भी  यहाँ करने  को बेईमान  अब स्वतंत्र है  .





देश जो शांति का था कभी स्थाई सदन ;

आज पलटा रूप हथियारों का  ये संयंत्र है  .


माफिया हैं  हुक्मरान या  हुक्मरान  माफिया 
सच  कहे   कैसे  जुबां ?  भयभीत  स्वरयंत्र  है  .


                                                        SHIKHA  KAUSHIK 


2 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

माफिया हैं हुक्मरान या हुक्मरान माफिया
सच कहे कैसे जुबां ? भयभीत स्वरयंत्र है

sach kah rahi hain aap fir bhi aap ki ye lekhni hi bata rahi hai ki kahin n kahin ab bhi sahas shesh hai.bahut khoob vah.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सटीक और सार्थक लिखा है ...