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शुक्रवार, 8 जुलाई 2011

माँ ! वो पारस है !

माँ  ! वो पारस है !

कभी माँ के थके पैरों को दबा कर देखो 
ख़ुशी जन्नत की अपने दिल में तुम पा जाओगे .

जिसने देकर के थपकी सुलाया है तुम्हे 
क्या उसे दर्द देकर चैन से सो पाओगे ?

करीब बैठकर माँ की नसीहतें भी सुनो 
कई गुस्ताखियाँ   करने से तुम बच जाओगे .

उसने हर फ़र्ज़ निभाया है बड़ी तबियत से 
उसके हिस्से का क्या आराम तुम दे पाओगे ?

उम्रदराज़ हुई चल नहीं वो पाती है 
उसे क्या छोड़ पीछे आगे तुम बढ जाओगे ?

जिसने कुर्बान करी अपनी हर ख़ुशी तुम पर 
उसके होठों पे क्या मुस्कान सजा पाओगे ?

तुम्हे छू कर  के मिटटी से बनाती सोना 
माँ ! वो पारस है उसे भूल कैसे पाओगे ?

                               शिखा कौशिक 

7 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव ..
पर जिसके पास माँ की नसीहत
सुनने का वक्त न हो वो क्या इस नसीहत को समझेगा ..

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

करीब बैठकर माँ की नसीहतें भी सुनो
कई गुस्ताखियाँ करने से तुम बच जाओगे .

बहुत सुंदर भाव लिए पंक्तियाँ रची हैं....बधाई

चैतन्य शर्मा ने कहा…

Sabse pyari lagati Maa....

S.N SHUKLA ने कहा…

sundar , ati sundar bhavabhivyakti....

S.N SHUKLA ने कहा…

bahut sundar bhav, bahut khoobsurat post

Anita ने कहा…

करीब बैठकर माँ की नसीहतें भी सुनो कई गुस्ताखियाँ करने से तुम बच जाओगे .

बहुत सुंदर भावनाओं को दर्शाती प्रेरणादायी पोस्ट !

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

कभी माँ के थके पैरों को दबा कर देखो ख़ुशी जन्नत की अपने दिल में तुम पा जाओगे .
जिसने देकर के थपकी सुलाया है तुम्हे क्या उसे दर्द देकर चैन से सो पाओगे ?

सुंदर कोमल और संवेदनशील भाव
बेहद खूबसूरत.