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मंगलवार, 1 मार्च 2011

ॐ नमः शिवाय

आज ह्रदय से प्रभु तुम्हारा
अनुपम ध्यान मैं करती हूँ  ;
कलम बनेगी कमंडल मेरा
कविता से पूजा करती हूँ .
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प्रभु  आपके अनुपम रूप को
शब्दों में कैसे लिख दूँ ;
यही सोचकर ह्रदय में मेरे
असमंजस -सी रहती है .
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कोई तुमको भोला कहता
कोई कहता भूतनाथ  ;
मैं नाम तुम्हारा   क्या रख दूँ ?
तुम ही बतलाओ जगतनाथ .
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त्रिनेत्र हैं पास तुम्हारे   जब
मुझको क्यों जीवन -चिंता हो !
संकट मुझपर जब भी आये 
तब तुम ही सहायता करते हो .
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नीले रंग का यह गात प्रभु
आकाश सद्रश ही लगता है ;
हो  गगन तुम्ही या तुम्ही गगन 
कौतुहल हर पल रहता .
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मस्तक पर अर्ध -चन्द्र शीतल 
माँ गौरी बाएं विराज रही ;
नंदी अतिप्रिय तुम्हारे हैं 
गंगा जटा में है साज रही  .
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एक   बार प्रभु मुख दर्शन ही 
सारी पीड़ा हर लेता है ;
सर्पों का जोड़ा ग्रीवा में 
अति  अद्भुत शोभा देता है .
*********************** जय भोलेनाथ !


5 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

बहुत खूब.
महाशिवरात्रि की आपको भी बहुत बहुत शुभकामनायें.

चैतन्य शर्मा ने कहा…

बहुत सुन्दर शिखा दी.....शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें....

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

भोलेनाथ की सुंदर स्तुति ...... शिवरात्रि की शुभकामनायें

यशवन्त माथुर ने कहा…

शिवरात्री की शुभकामनाएं.

Anita ने कहा…

सुंदर भाव लिये भक्तिमय कविता !