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रविवार, 18 जनवरी 2015

*सुना कुत्तों की दावत है !*


Stormy Clouds Weather Stock Photo - 19770770
कहर बरसा  मेरे घर तो वो बोले सब सलामत है ,
गई छींटें जो उनकें घर तो बोले अब क़यामत है !
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मेरे बच्चों ने पी पानी गुज़ारी रात सारी है ,
बराबर के बड़े घर में सुना कुत्तों की दावत है !
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बिना गाली के जिनकी गुफ्तगूं होती नहीं पूरी ,
हमें इलज़ाम देकर कह रहे हम बे-लियाकत हैं !
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क़त्ल करते हैं और लाशों पे जो करते सियासत हैं ,
नहीं मालूम उनको एक अल्लाह की अदालत है !
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हमारे हाथ में है जो कलम वो सच ही लिखेगी ,
कलम के कातिलों से इस तरह करनी बगावत है !


शिखा कौशिक 'नूतन'

1 टिप्पणी:

KAHKASHAN KHAN ने कहा…

यह दौर ही ऐसा है। जिसमें मानवीयता और संवेदनाएं धीरे धीरे मरती जा रही हैं। पड़ोसी भूखा रहे इसकी किसी को चिंता नहीं है।