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मंगलवार, 17 जून 2014

'कलम क्या उसकी खाक लिखेगी !!'



नहीं हादसे झेले जिसने ,
आहें नहीं भरी हैं जिसने ,
अगर थाम ले कलम हाथ में ,
कलम क्या उसकी खाक लिखेगी !!
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पलकें न भीगीं हो जिसकी ,
आंसू  का न स्वाद चखा हो ,
अगर लगे दर्द-ए-दिल गानें  ,
दिल पर कैसे धाक जमेंगी !!
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नहीं निवाले को जो तरसा ,
नहीं लगी जिस पेट में आग ,
बासी रोटी  खा  लेने को ,
आंतें उसकी क्यों उबलेंगी  !!

शिखा कौशिक  'नूतन  ' 

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