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रविवार, 4 दिसंबर 2011

भारत माँ को नमन


भारत माँ को नमन 



अपनी जमीन सबसे प्यारी है ;
अपना गगन सबसे प्यारा है ;
बहती सुगन्धित मोहक पवन ;
इसके नज़ारे चुराते हैं मन ;
सबसे है प्यारा  अपना वतन ;
करते हैं भारत माँ को नमन 
वन्देमातरम !वन्देमातरम !
करते हैं भारत माँ ! को नमन .
उत्तर में इसके हिमालय खड़ा ;
दक्षिण में सागर सा पहरी अड़ा ;
पूरब में इसके खाड़ी बड़ी ;
पश्चिम का अर्णव करे चौकसी ;
कैसे सफल हो कोई दुश्मन ! 
करते हैं भारत माँ को नमन !
वन्देमातरम !वन्देमातरम !
करते हैं भारत माँ! को नमन .

हम तो सभी से बस इतना कहें ;
हिन्दू मुसलमान मिलकर रहें ;
नफरत की आंधी अब न चले;
प्रेम का दरिया दिलों में बहे ;
चारों दिशाओं में हो अमन ;
करते हैं भारत माँ! को नमन !
वन्देमातरम!वन्देमातरम!
करते हैं भारत माँ !को नमन .
                          जय हिंद !

8 टिप्‍पणियां:

चैतन्य शर्मा ने कहा…

करते हैं भारत माँ! को नमन !
वन्देमातरम!वन्देमातरम!
करते हैं भारत माँ !को नमन ....

सुंदर ...

S.N SHUKLA ने कहा…

बहुत ख़ूबसूरत , सुन्दर भाव, सादर.

मेरे ब्लॉग पर भी आप सादर आमंत्रित हैं.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है! अधिक से अधिक पाठक आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो
चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

Rajesh Kumari ने कहा…

vande mataram...bahut uttam bhaav.shubhkamnaayen.

Rajesh Kumari ने कहा…

bahut achchi aavaz me pyaara deshbhakti geet suna.very nice.

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

सुन्दर भाव लिए रचना

कविता रावत ने कहा…

bahut achhi deshprem se saji rachna..abhar!

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

जयहिंद....
सादर..