समर्थक

सोमवार, 14 अप्रैल 2014

'दर्द से दिल मेरा फटने लगा '



मेरे ख्वाबों का कद बढ़ने लगा मुझको सजा दो ,
मुझे घर जेल सा लगने लगा मुझको सजा दो !
..................................................................
मिली तालीम मैंने भी पकड़ ली हाथ में कलम ,
मेरा हर दर्द बयां होने लगा मुझको सजा दो !
..........................................................................
लांघकर चौखटे रखा जो कदम मैंने हिम्मत से ,
खौफ दुनिया का है घटने लगा मुझको सजा दो !
..................................................................
उठा पर्दा जो आँखों से दिखा अपना वज़ूद तब ,
सोया अरमान हर जगने लगा मुझको सजा दो !
.............................................................................
मुझे अब चीखना पुरजोर  'नूतन' इस ज़माने में ,
दर्द से दिल मेरा फटने लगा मुझको सजा दो !

शिखा कौशिक 'नूतन'

रविवार, 13 अप्रैल 2014

मेरी बहन बहन ...तेरी बहन प्रेमिका !!!

मेरी बहन बहन ...तेरी बहन प्रेमिका !!!
[google se sabhar ]

लड़का लड़की ने मिलकर सोचा 
''प्रेम ही सब कुछ  है  ''
हम दोनों  एक  दूजे  के  
बिना   मर   जायेंगे  !
माता  -पिता बहन-भाई 
ये सब क्या खाक साथ निभायेंगें ?
वैसे भी हम अपनी भलाई जानते हैं 
इसीलिए मर्यादा ;नैतिकता;
पारिवारिक नियंत्रण को हम नहीं मानते हैं .
दोनों योजना बनाकर फरार हो गए ;
घरवालों ने मिन्नतें की 
तो लौट आने को तैयार हो गए ,
जिस  दिन दोनों का विवाह हुआ 
एक और हादसा हो गया ;
लड़की का भाई लड़के की बहन 
को लेकर रफूचक्कर हो गया .
जो लड़का खुद किसी और की 
बहन को लेकर भागा था 
आज  उसके सिर शैतान सवार हो गया ;
बोला बदचलन बहन को 
सबक सिखाऊंगा ;
मर्यादा लांघी है परिवार की 
इसका मज़ा चखाऊंगा ,
ढूँढकर  दोनों को ज्यों ही 
रिवाल्वर साले पर तानी 
साले ने भी जेब से पिस्टल निकाली 
बोला -ये बदला है मेरे परिवार की
इज्ज़त  से खेलने का ;
मैंने  भी तुम्हारी इज्ज़त 
मिटटी   में मिला डाली !!!!!

                                           shikha kaushik 
                                            [vikhyat ]