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शनिवार, 28 जुलाई 2012

पर बात इतनी सी नहीं ..


पर बात इतनी सी नहीं ..
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जैसे तुम चाहते हो 
मैं वैसे ही वस्त्र धारण कर लेती ,
यदि इससे रूक सकता 
स्त्री से दुर्व्यवहार !
सच मानो मैं अपनी देह को 
ढक लेती हजार बार !
पर बात इतनी सी नहीं ..

स्त्री की देह मात्र देह नहीं 
वो है दुश्मन  को नीचा  
दिखाने  का साधन ;
आज से नहीं 
युगों युगों से ,
सीता हरण ;द्रौपदी का 
चीर हरण ,
इसके ही तो परिणाम थे ,
फिर कैसे रूक जायेगा 
आज ये चलन ?

बीहड़ से लेकर गुवाहाटी तक ;
पुरुष के ठहाके  
स्त्री का चीत्कार ,
स्त्री देह को निर्वस्त्र करने 
का पुरातन व्यभिचार .

सांप्रदायिक दंगें
खून की होलियाँ 
और  यहाँ भी शिकार बनती 
स्त्री देह ,
सर्वोतम  तरीका प्रतिशोध  चुकाने  का 
नोंच  डालो दुश्मन की 
स्त्री की देह .

...फिर भी तुम्हे लगता है 
कि जैसे तुम कहते हो 
वैसे वस्त्र धारण से 
 रूक सकता है 
स्त्री से दुर्व्यवहार !
सच मानो मैं अपनी देह को 
ढक लूंगी  हजार बार !
पर बात इतनी सी नहीं ..

                  शिखा कौशिक 
                [विख्यात ]

गुरुवार, 26 जुलाई 2012

कारगिल विजय दिवस -सलाम हिन्दुस्तानी सैनिकों को !



कारगिल  विजय  दिवस -सलाम  हिन्दुस्तानी सैनिकों  को !


लग  जाती है लगन जब  ;होकर   के मगन  तब  , हम धरती आसमान मिला देते हैं , हम हिन्दुस्तानी  सैनिक जो ठान लेते हैं कर के दिखला   देते हैं . मर मर कर हमने  कभी  सीखा नहीं है जीना ; जोश हमारा देखकर दुश्मन को आता पसीना  , हम जयहिंद के नारों से आकाश गूंजा  देते हैं . हम हिन्दुस्तानी सैनिक जो ठान लेते ....... पीछे कदम न   हटाते आगे ही बढ़ते   जाते   ;
सीनों पे  खाते हैं गोली पीठ नहीं   हैं दिखाते  ;
हम खून बहाकर माँ  की आन बचाते हैं .
हम हिन्दुस्तानी  सैनिक  जो  ठान  ....                              SHIKHA KAUSHIK 

मंगलवार, 24 जुलाई 2012

तन को चुपड़ना छोड़ सखी कर बुद्धि का श्रृंगार .

तन को चुपड़ना छोड़ सखी कर बुद्धि का श्रृंगार .
Beautiful Indian Brides
देह की चौखट के पार पड़ा है प्रज्ञा का संसार ;
तन को चुपड़ना छोड़ सखी कर बुद्धि का श्रृंगार .

कब तक उबटन से मल - मल कर निज देह को तुम  चमकाओगी ?
कुछ तर्क-वितर्क  करो  खुद से अबला कब तक कह्लोगी   ,
केशों की सज्जा छोड़ सखी मेधा को आज सँवार .
तन को चुपड़ना छोड़ ......

पैरों में रचे  महावर है ; हाथों में रचती  है मेहँदी ,
नयनों में कजरा लगता है ; माथे पर सजती  है बिंदी ,
सोलह सिंगार तो बहुत हुए अब  उठा  ज्ञान  तलवार  .
तन को चुपड़ना छोड़ ....

हाथों में कंगन;  कान  में झुमका;  गले में पहने हार  ;
पैर  में पायल;  कमर में तगड़ी ; कितने  अलंकार ?
ये कंचन -रजत के भूषण तज फौलादी करो विचार .
तन को चुपड़ना छोड़ सखी कर बुद्धि  का श्रृंगार  .
                                          शिखा कौशिक 
                                     [विख्यात ]

बुधवार, 18 जुलाई 2012

वाह रे पत्रकार ...वाह वाह रे पत्रकार !

वाह रे पत्रकार  ...वाह वाह रे पत्रकार  !


ये पराकाष्ठा है संवेदनहीनता की .गुवाहाटी  में एक ओर असामाजिक तत्व एक युवती की अस्मत तार तार करने में लगे थे और दूसरी ओर वहां उपस्थित एक स्थानीय टेलीविजन के पत्रकार महोदय इस हादसे की वीडियो बना रहे थे .गौरव ज्योति नियोग नाम के इस पत्रकार ने पूरी  मानवता  को शर्मसार  कर दिया है और आज की मीडिया को कटघरे में खड़ा कर दिया है .स्वयं कुछ करने का साहस नहीं था तो कम  से  कम पुलिस को ही सूचित कर देता .चैनल के एडिटर इन चीफ  का बयान  और भी  काबिल-ए-तारीफ  है .ये जनाब फरमाते हैं कि-''मैं अपने रिपोर्टर के साथ हूँ जिसने अपना काम किया है .''  भाई वाह !!रिपोर्टर होने से पहले वह एक इन्सान है और जो दूसरे इन्सान पर   की जा रही  ज्यादती  को नहीं रोकता  वो  इन्सान कह लाने के काबिल नहीं .एक और धमाकेदार  काम किया है महिला  आयोग की टीम मेंबर  सुश्री  अल्का  लाम्बा ने .इन महोदया  ने उस पीड़ित  लड़की  की पहचान  सार्वजानिक कर दी .शाबाश !!ऐसे  ही करतब  दिखाते  रहे तो समाज में महिलाओं की स्थिति  बहुत मजबूत     होगी  .एक बार फिर से उन पत्रकार महोदय को सलाम  ....बस  ऐसे ही कर्म   करना   जब तुम्हारे  सगे  के साथ  ऐसा हो   .वाह रे पत्रकार ....वाह वाह रे पत्रकार .!!!
[dainik hindustan ]


सामने तेरे हुई अस्मत किसी की तार तार 
और तू करता रहा बस वीडियो तैयार  ,
वाह रे पत्रकार ...वाह वाह रे पत्रकार .

क्या जरूरी था वहां  ये फैसला न कर सका ;
इन्सान होकर दे ही दी इंसानियत को ही दगा ,
धिक्कारता है दिल  सभी का आज  तुझको बार बार .
वाह रे पत्रकार .....

रक्षा का देते आये हैं जिस देश में भाई वचन ;
इस तरह बेबस हुई खुलेआम हाय ये बहन ,
हैवानियत  का कर रहा 'यू ट्यूब ' पर प्रचार .
वाह रे पत्रकार .....


सनसनी के वास्ते वीडियो बना लिया  ;
दरिंदगी को रोकने को क्यों नहीं लोहा लिया ?
ज़मीर तेरा मर चुका कर ले ये स्वीकार 
वाह रे पत्रकार ....वाह वाह रे पत्रकार !

                        शिखा  कौशिक  
                       [विख्यात ]




मंगलवार, 17 जुलाई 2012

बेटा मस्ती ...बेटी एक जबरदस्ती है


बेटा  मस्ती  ...बेटी  एक  जबरदस्ती  है 

मंहगाई  के   दौर  में भी  कितनी  सस्ती  है ;
जान  बेटियों  की  सब्जी  से भी सस्ती है .
कोख  में आई  कन्या इसको क़त्ल करा   दो ;
जन्म दिया  तो  फाँस गले में आ फंसती है .
क़त्ल किया  कन्या का  इसने ..उसने   ..सबने   ;
मैं कैसे रूक जाऊं  मेरी  क्या हस्ती  है ?
बेटी के  कारण  झुकते  हैं बाप  के  कंधे ;
इसी सोच   की   फांसी   बेटी को  लगती है .
''कन्या भ्रूण  बचाओ ''नारों   से क्या होता  ?
बेटा  मस्ती  ...बेटी  एक  जबरदस्ती  है .
                                                              क्या आप इन बातों  से  सहमत  हैं  ?.....
                                                                    शिखा  कौशिक 
                                                       [विख्यात ]

महाशिवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनायें !


महाशिवरात्रि पर्व  की  हार्दिक  शुभकामनायें !
Animated Lord Shiva Wallpapers 5
आया  है मास  ये  सावन  का शिव  डमरू  बजेगा  ;
बम  बम  भोले कहकर के कावाडिया   नाचेगा .
हम  हरिद्वार  जायेंगे   गंगा जल लायेंगें 
लाकर शिवलिंग पर उसको श्रद्धा   से चढ़ाएंगें   ,
गौरा के संग भोला उर आन  विराजेगा  .
बम बम भोले .......
जय भोलेनाथ की 
शिखा कौशिक 

रविवार, 15 जुलाई 2012

ले कावड चल हरिद्वार चल ....


ले कावड चल हरिद्वार चल ....
File:Har-ki-Pauri during Kavad Mela, Haridwar.jpg
[google se sabhar ]
ले कावड चल हरिद्वार चल ;
हरिद्वार से ला गंगा जल ,
गंगा जल  शिवलिंग  पर  चढ़ाना  ;
मन की मुरादें शिव से पाना .
ले कावड चल हरिद्वार चल ....
सब मासों में  मास निराला ;
श्रावण मास है शिव को प्यारा ,
शिव महिमा जो इसमें गाता ;
मन चाहा वर  शिव से पाता   ,
शिव चरणों में शीश झुकाना  .
मन की मुरादें शिव से पाना ;
ले कावड चल हरिद्वार चल !
शिव मेरा भोला भंडारी ;
हर लेता विपदाएं भारी ,
ये हैं आदिदेव कामारि ;
ये शंकर ये हैं त्रिपुरारी  ,
बम  भोले कह गगन  गुंजाना .
मन की मुरादें शिव से पाना .
ले कावड चल हरिद्वार चल ....
  
                                                    जय गौरी शंकर की !
                 शिखा कौशिक 


शुक्रवार, 13 जुलाई 2012

ये हवस की इंतिहा' है इससे ज्यादा क्या कहें ?

ये हवस की  इंतिहा' है इससे ज्यादा क्या कहें ?


Shocking: 20 men molest girl in Guwahati
[Shocking: 20 men molest girl in Guwahati]
लुट रही अस्मत किसी की  जनता  तमाश बीन   है  ;
इंसानियत  की निगाह  में   जुल्म  ये संगीन    है  .



चैनलों  को  मिल  गयी  एक नयी ब्रेकिंग न्यूज़  ;
स्टूडियों में  जश्न है मौका  बड़ा  रंगीन  है .

अखबार में  छपी  खबर  पढ़  रहे  सब चाव से ;
पाठक भी  अब ऐसी खबर  पढने  के  शौक़ीन हैं .

ये हवस की इंतिहा'  है इससे ज्यादा क्या कहें ?
कर न  लें औरत को   नंगा ये मर्द  की तौहीन  है .

बीहड़  बनी ग़र  हर  जगह  कब  तक  सहेगी  जुल्म  ये ;
कई  और  फूलन  आएँगी  पक्का  मुझे  यकीन  है .

                                शिखा  कौशिक  
                                [विख्यात ]

गुरुवार, 12 जुलाई 2012

इतिहास में सबसे दुखद सिया-राम का वियोग !



इतिहास  में सबसे  दुखद सिया-राम का  वियोग !

वन  को  चली जब जानकी ;
श्रीराम  हो गए  विह्वल  ,
उर  में  मची  उथल -पुथल ;
हुए  कमल  नयन  सजल  .



मन  में उठी  एक  हूक   सी   ;
कैसे सिया  को रोक  लूँ ?
सीता है स्वाभिमानिनी ;
कैसे उसे लज्जित  करूं ?




नैनों सम्मुख  अनायास  ही 
शिव- धनुष- भंग झांकी सजी ,
वरमाला ले आती हुई 
सुन्दर सुकोमल सिया दिखी  .







छूने को ज्यों  ही आगे  बढे   ;
भ्रम  टूटा एक ठोकर लगी ,
फिर  दौड़कर   लक्ष्मण ने   
थामा ,काल  की अदभुत  गति  .







सीता खड़ी  देखे  उन्हें  ;
कैसा विचित्र संयोग  है !
पहले मिलन  फिर विरह    ;
फिर फिर मिलन वियोग  है  .








जाउंगी  छोड़  प्राण  मैं ;
यही  आपके  चरणों  में  अब  ,
बस  है निशानी  गर्भ  में 
ये  ही  मेरी  संपत्ति सब .






महलों  के  सुख  सब छोड़कर ; 
सम्मान  रक्षा  हित चली 
अब आप धीरज  बांध लें ;
देव  की  इच्छा  बली .


संवाद  नैनों से हुए;
सिया -राम  दोनों  मौन  थे ,
ये क्षीर  सागर  प्रेमी  युगल  ,
क्या  जाने जग ये कौन थे ?

है कैसा प्रस्तर देव उर  ?
जो  रचता  ये दुर्योग  है ,
इतिहास  में सबसे  दुखद  ,
सिया-राम का  वियोग है .





बुधवार, 11 जुलाई 2012

खून के रिश्ते पानी होते हमने देखे .

खून के रिश्ते पानी होते हमने देखे .
Yuna
हमने लिहाज़ के टूटे बिखरे टुकड़े देखे ;

हमने माँ को गाली देते बेटे देखे .
Tear Pond
जिनको गोद उठाकर अब्बा खुश  होते थे ;
उनके कारण रोते हमने अब्बा देखे .
Tears of Diamond
जो  खाते  थे एक रोटी में आधी आधी 
भाई ऐसे  क़त्ल  भाई के करते  देखे .
Tears
लाये थे लक्ष्मी कहकर जिसको अपने घर 
उस लक्ष्मी को आग लगाते दानव देखे   .
Blue
कोख में कलियों को मसलते माली देखे;
खून के रिश्ते पानी होते हमने देखे .
                          
Blue Face


                          शिखा कौशिक 


मंगलवार, 10 जुलाई 2012

शिव शंकर को लगते हैं कावड़ये सबसे प्यारे !


शिव शंकर को लगते हैं कावड़ये  सबसे प्यारे !




File:Har-ki-Pauri during Kavad Mela, Haridwar.jpg


हमको गौरा प्यारी है  गौरा को शिव हैं  प्यारे ;
शिव शंकर को लगते हैं कावड़ये  सबसे प्यारे !
करते हैं स्वयं सुरक्षा पग  पग पर  कावड़यों   की ;
भर देते उनमे शक्ति  आगे बढ़ते रहने की ;
जय  शिव शंकर की कहते ही  मिटते  कष्ट हैं सारे !
                             जय गौरीनाथ की !
                           शिखा कौशिक