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सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

ये ज़िन्दगी है प्यारे !

अंजली

ना राहों का पता है 
ना मंज़िल का पता है ;
ये ज़िन्दगी है प्यारे !
इसे जीने में मज़ा है .
epiphyllum
अपनों के संग हंस ले ;
अपनों के संग रो ले ;
अपनों में बाँट खुशियाँ ;
अपनों से दर्द कह ले ;
अपने ही साथ न हो 
तो जीवन बेमज़ा है 
ये ज़िन्दगी है ........



सबकी है जुदा कहानी ;
ये तो है बहता पानी ;
कभी तपती आग सी है ;
कभी लगती बड़ी सुहानी ;
इसे जी ले मानकर ये 
यही मालिक की रज़ा है .
ये ज़िन्दगी ....................


                                     शिखा कौशिक 
                                [विख्यात]



शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें !

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें 


Shiva Wallpaper

मेरे मन बनकर तू डमरू 
करता जा डम-डम-डम 
तेरी डम -डम में गूंजेंगी 
मेरे भोले की बम-बम 
मेरे मन बनकर तू ......


मेरा भोला सब भक्तों  के 
है सारे  कष्ट  मिटाता  
वो भक्तों की रक्षा  हित  
है कालकूट  पी  जाता 
मेरी  जिह्वा  करती चल  तू 
शिव महिमा   का ही वर्णन  
मेरे मन ..........................


मेरा भोला कितना  भोला 
नागों  का हार  पहनता   
वो  जटाजूट  में अपने 
गंगा  को  धारण  करता
मैं कण -कण  में करती हूँ 
शिव-शंकर का ही दर्शन .
मेरे बन ................


सावन में कांवड़ लेकर  जो    
गंगाजल लेने जाते 
लाकर शिवलिंग  पर उसको      
श्रृद्धा  सहित चढाते 
हर इच्छा पूरी होती 
पावन हो जाता जीवन .
मेरे मन बनकर.....


द्वादश ज्योतिर्लिंगों  में शिव
-शक्ति ज्योत समाई ;
इनके दर्शन से भक्तों ने 
भय से मुक्ति पाई ;
गौरी-शंकर के चरणों में 
तन -मन-धन सब अर्पण 
मेरे मन बनकर .....


                                  शिखा कौशिक 
                        [विख्यात ]












सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

सच कहूँ ... मुझे अच्छा नहीं लगता !


जब कोई टोकता है 

इतनी उछल कूद
मत मचाया कर 
तू लड़की है 
जरा तो तमीज़ सीख ले  
क्या  लडको  की  तरह  
घूमती -फिरती  है 
सच  कहूँ 
मुझे  अच्छा  नहीं  लगता  !

जब कोई कहता है 
तू लड़की है 
अब बड़ी हो गयी है 
क्या गुड़ियों से खेलती 
रहती है ?
घर के काम काज में 
हाथ बंटाया कर 
सच कहू 
मुझे अच्छा नहीं लगता !

जब कोई समझाता  है 
माँ को 
ध्यान रखा करो इसका 
जवान हो गयी है 
कंही कुछ ऊँच  -नीच 
न कर बैठे 
सच कहूँ 
मुझे अच्छा नहीं लगता !

पिता जी जब हाथ जोड़कर 
सिर-कंधें झुकाकर
लड़के वालों से करते 
हैं मेरे विवाह की बात 
हैसियत से ज्यादा दहेज़ 
देने को हो जाते है तैयार 
सच कहूँ 
मुझे अच्छा नहीं लगता ! 

ससुराल में जब 
सुनती हूँ ताने 
क्या दिया तेरे बाप ने ?
माँ ने कुछ सलीका नहीं सिखाया ?
सच कहूँ 
मुझे अच्छा नहीं लगता !

बेटा जन्मा ...थाल बजे 
उत्सव मनाया गया 
बेटी जन्मी ...मातम 
सा छा गया 
बेटे को दुलारा गया 
बेटी को दुत्कारा गया 
सच कहूँ 
मुझे अच्छा नहीं लगता !

मेरी बेटी भी 
उसकी होने वाली बेटी भी 
क्या यही सब सहती रहेंगी 
बस यही कहती रहेंगी ?
सच कहूँ 
मुझे अच्छा नहीं लगता !
  

शनिवार, 11 फ़रवरी 2012

मेरा वतन मेरा वतन











मेरा    वतन    मेरा    वतन    
कोयल  की  मीठी     बोली सा   
ये   सतरंगी    रंगोली   सा   
नन्हें    -मुन्नों  की  टोली  सा  
दीवाली  सा  और  होली  सा  
मेरा  वतन .....................

ये  निर्मल  है  ..अति  पावन   है
सुन्दरतम  है  ..मनभावन  है  
ये   अद्भुत  है  ये  है  अनुपम  
मेरा  वतन  ..........................

ये  गहन   निशा  में  है  सविता    
ये  चन्द्रकिरण   की  शीतलता  
सूखी  भूमि   पर   है  सरिता   
और  कविराज   की  है  कविता   
मेरा  वतन  ....................


अभिराम  वत्स  ये  धरती  का  
ये  प्रिय   सखा  है  सृष्टि  का  
ये  हिम  शुभ्र  सा  है  उज्जवल  
ये  कलावंत का  है  कौशल  
मेरा  वतन  ......................

                                      जय  हिंद  !जय  भारत  !

                                                     शिखा  कौशिक  
                                                  [विख्यात ] 





रविवार, 5 फ़रवरी 2012

नारी दुर्गा है ''चिकनी -चमेली '' नहीं !

 नारी दुर्गा है ''चिकनी -चमेली '' नहीं !

                                                 Durga Wallpaper
                                                      


''हू ला ला'' पर थिरके कदम 
''शीला-मुन्नी'' पर निकले है दम 
नैतिकता का है ये पतन 
दूषित हो गया अंतर्मन 
ओ फनकारों करो कुछ शर्म 
शालीन नगमों का कर लो सृजन 
फिर से सजा दो लबो पर हर दम 
वन्देमातरम .....वन्देमातरम !

नारी का मान घटाओ नहीं 
प्राणी है वस्तु बनाओ नहीं 
तराने रचो तो रचो सोचकर 
शक्ति है नारी तमाशा नहीं 
नारी की महिमा का फहरे परचम 
फिर से सजा दो ..........

नारी है देवी पहेली नहीं 
दुर्गा है ''चिकनी -चमेली '' नहीं 
इसका सम्मान जो करते नहीं 
फनकारी के काबिल नहीं 
बेहतर है रख दें वे अपनी कलम 
फिर से सजा दो ..............
                                       शिखा कौशिक 
                                   [विख्यात]

भारत माता की जय !


भारत माता की जय !









छिप कर क्यों आता है कायर ?
आगे से आकर दिखा !
हम हैं वतन के प्रहरी 
आँखें मिलकर दिखा !
तेरी हर साजिश को हम नाकाम कर देंगे 
ओ दुश्मन तेरा काम हम तमाम कर देंगे !





पीछे से करता क्यों वार है ?
आगे से आकर दिखा !
है बहादुर तू अगर 
मुंह न ऐसे छिपा ;
तेरी हर साजिश को हम नाकाम कर देंगे 
ओ दुश्मन तेरा क़त्ल खुलेआम कर देंगे !
तेरी हर ...........


छिपकर चलाता क्यों गोली ?
आगे से आकर चला ;
हम हैं खड़े सीना ताने 
हमको मिटाकर दिखा 
तेरी हर साजिश को हम नाकाम कर देंगे 
हंसकर अपने प्राणों का बलिदान कर देंगे !
छिपकर क्यों आता है ...........
                                               जय हिंद !
                                    शिखा कौशिक 
                              [विख्यात ]

शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

भक्ति-अर्णव ]-मैया बार बार आ !




शेरावाली शेर पर सवार होकर आ ;
हाथों में शंख -तलवार लेकर आ;
दुष्टों का करने संहार माता आ ;
भक्तों के खाली भंडार भरने  आ ;
एक बार आ मैया बार बार आ !

दुर्गा रूप में दुर्गम संकट को हरने वाली ;
चंडी रूप में दुष्टों का मर्दन करने वाली ;
तू रमा ,उमा ,ब्रहमाणी  का रूप धर कर आ !
एक बार .......
अपनी माया से माता दुष्टों की प्रज्ञा हरती ;
ये देवी सब भक्तों की बुद्धि प्रकाशित करती ;
तू गौरी;काली;शर्वाणी का रूप धर कर  आ !
एक बार ........
हे ईशा !हम भक्तों को इस भव सागर से तार ;
सुन ले अब जगदम्बा हम सबकी करुण  पुकार;
तू शिवा,जया और भीमा का रूप धर कर आ !
एक बार आ .......................
                                            जय माता दी !
                                         शिखा कौशिक 
                            [भक्ति-अर्णव ]