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शनिवार, 28 मई 2011

मेरी बेटी

मेरी  बेटी                                               ''गूगल से साभार ''

फूल सी प्यारी है वो और मखमल सी नरम ,
है चपल तितली के जैसी ;रेशमी उसकी छुअन ,
दौड़ती खरगोश सी,कोयल के जैसी बोलती,
मीठी-मीठी बातों से कानों में अमृत घोलती ,
खिलखिलाती धूप-सम ;मुस्कुराती चांदनी,
बाँटती खुशियों के मोती ,क्रोध में है दामिनी ,
वो क्षमा है ,वो शिवा है,वो है काली-भैरवी , 
वो जया है ;वो है दुर्गा,वो है सारा-वाभ्रवी,
मुझसे ही जन्मी है वो ,मेरा ही तो रूप है ,
सृष्टि की संचालिका ,अनुपम है वो अनूप है .
                                         शिखा कौशिक



बुधवार, 25 मई 2011

तू एक कतरा है .



मौत का खौफ उसे होता ही नहीं ;
जो बहुत हादसों से गुजरा है .

सुना रही थी वो दर्द अपना रोते-रोते
मगर दुनिया की नजर में वो एक मुजरा है .

परायों की बेरुखी के परवाह है किसे ?
यहाँ तो अपनों की बेवफाई का खतरा है .

जिन्दगी भर समझता रहा खुद को दरिया ;
आखिरी साँस में समझा कि तू एक कतरा है .

जलील करके हमें घर से निकालाजिसने 
कहें कैसे कि वो ''जिगर का टुकड़ा है '.

सच को सच कहने का हौसला न रहा ;
कैसी मजबूरियों ने आकर हमें जकड़ा है . 
                                             शिखा कौशिक 

गुरुवार, 19 मई 2011

सबसे खुशनसीब

सबसे   खुशनसीब 

औलाद जो सदा माँ के करीब  है ;
सारी दुनिया में वो ही खुशनसीब  है .

जिसको परवाह नहीं माँ के सुकून की ;
शैतान का वो बंदा खुद अपना रकीब है .

दौलतें माँ की दुआओं की नहीं सहेजता 
इंसान ज़माने में वो सबसे गरीब है .

जो लबों पे माँ के मुस्कान सजा दे 
दिन रात उस बन्दे के दिल में मनती ईद है .

माँ जो खफा कभी हुई गम-ए -बीमार हो गए ;
माँ की दुआ की हर दवा इसमें मुफीद है .

है शुक्र उस खुदा का जिसने बनाई माँ !
मुबारक हरेक लम्हा जब उसकी होती दीद है .
   
                         शिखा कौशिक 




शनिवार, 7 मई 2011

खुदा का नूर है-the mother




बड़े तूफ़ान में फंसकर भी मैं बच जाती हूँ ;
दुआएं माँ की मेरे साथ साथ चलती हैं .
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तमाम जिन्दगी उसकी ही तो अमानत है  ;
सुबह होती है उसके साथ ;शाम ढलती है .
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खुदा का नूर है वो रौशनी है आँखों की ;
शमां बनकर वो दिल के दिए में जलती है 
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नहीं वजूद किसी का कभी उससे अलग ;
उसकी ही कोख में ये कायनात पलती है .
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उसके साये में गम के ओले नहीं आ सकते ;
दूर उससे हो तो ये बात बहुत खलती है .
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मेरे लबो पे सदा माँ ही माँ  रहता है ;
इसी के  डर से  बला अपने आप टलती है .
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बुधवार, 4 मई 2011

खट्टी -मीठी यादें !

खट्टी -मीठी यादें !

टूटे  फूटे  वादे    ,कभी     ताने  और     फरियादें     ,
इनसे   ही   बन   जाती   हैं   खट्टी मीठी यादें .

फूलों   के   जैसे   हँसना   ,आँखों   से   मोती   झरना   ,
मरते   मरते   जीना   ,कभी    जीते   जीते   मरना   ,
ऐसे   जुड़ते   जाते   किस्से   ये   सीधे   सादे   .
इनसे   ही   बन   जाती   हैं   खट्टी मीठी यादें .
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गले लगाकर मिलना ,लड़ना और झगड़ना ,
ममता की बरसातें और कभी क्रोध में तपना ,
फिर भी जुड़ते जाते टूटे रिश्तों के धागे .
इनसे ही बन जाती हैं खट्टी मीठी यादें .
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कभी जेठ की गर्मी ,सावन की कभी फुहारें ,
कभी अमावस की रजनी ,कभी पूनम के उजियारे ,
कुदरत रोज बजाती नए सुरों में बाजें .
इनसे ही बन  जाती हैं खट्टी मीठी यादें .
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मेरी आवाज में -